रायगढ़ तहसील कार्यालय में नकल आवेदन डेढ़ माह से लंबित, आवेदक ने सुशासन और जवाबदेही पर उठाए सवाल

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से सुशासन, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा वितरण पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन रायगढ़ तहसील कार्यालय में एक नकल आवेदन के करीब डेढ़ माह से लंबित रहने का मामला सामने आया है। आवेदक का आरोप है कि निर्धारित शुल्क जमा करने और तय तारीख के बावजूद उसे अब तक संबंधित राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है।

1 जुलाई को दिया आवेदन, 9 जुलाई को मिलनी थी नकल

आवेदक के अनुसार, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगने पर तहसीलदार एवं जनसूचना अधिकारी रायगढ़ शिव कुमार डनसेना ने लिखित जवाब में बताया था कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 256 के तहत राजस्व अभिलेखों की प्रतिलिपि विधिवत नकल आवेदन प्रस्तुत कर प्राप्त की जा सकती है।

इसके बाद आवेदक ने 1 जुलाई 2026 को विधिवत नकल आवेदन प्रस्तुत किया और निर्धारित 100 रुपये शुल्क जमा कर रसीद प्राप्त की। नकल शाखा की रसीद में संबंधित दस्तावेजों की नकल 9 जुलाई 2026 को उपलब्ध कराने का उल्लेख किया गया था।

डेढ़ माह बाद भी नहीं मिली अभिलेखों की प्रति

आवेदक का कहना है कि निर्धारित तारीख गुजरने के बाद भी उसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद उसने कई बार तहसील कार्यालय, नकल शाखा और संबंधित कर्मचारियों से संपर्क किया। आरोप है कि हर बार उसे यही जवाब मिला कि “फाइल नहीं मिली है।”

कलेक्टर से शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान

मामले को लेकर आवेदक ने 10 अगस्त 2026 को कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष लिखित शिकायत भी प्रस्तुत की। इसके बावजूद 22 अगस्त 2026 तक संबंधित नकल उपलब्ध नहीं हो सकी। आवेदक ने सवाल उठाया है कि जब उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, तो आम नागरिकों को समयबद्ध सरकारी सेवाएं किस तरह मिलेंगी?

अभिलेख प्रबंधन पर भी उठे सवाल

आवेदक का कहना है कि यदि किसी सरकारी कार्यालय में दर्ज प्रकरण अथवा राजस्व अभिलेख की प्रति उपलब्ध नहीं हो पा रही है और लंबे समय तक उसकी तलाश ही चलती रहे, तो इससे कार्यालय की अभिलेख प्रबंधन व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि, मामले में तहसील कार्यालय या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए आवेदन लंबित रहने के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अब रायगढ़ विधायक से प्रश्नात्मक निवेदन की तैयारी

आवेदक का कहना है कि वह रायगढ़ विधानसभा का एक सामान्य नागरिक है और इस मामले को लेकर रायगढ़ विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के समक्ष भी प्रश्नात्मक निवेदन करेगा। आवेदक ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से नागरिकों की अपेक्षा यही है कि सरकारी सेवाएं निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर उपलब्ध हों।

अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में जिला प्रशासन क्या संज्ञान लेता है और नकल आवेदन के लंबित रहने के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।

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