बिलासपुर में स्कूल सफाई कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, ढाई महीने से मानदेय नहीं मिलने पर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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ढाई महीने से मानदेय लंबित, वेतन विसंगति का भी आरोप; 5 तारीख तक भुगतान नहीं हुआ तो कलेक्टोरेट और DEO कार्यालय में आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्ट : अभिषेक कुमार पाण्डेय, बिलासपुर | छत्तीसगढ़
दिनांक : 18 अगस्त 2026

बिलासपुर। जिले के सरकारी स्कूलों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले स्कूल सफाई कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं। करीब ढाई महीने से मानदेय का भुगतान नहीं होने और लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारी कल्याण संघ ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द भुगतान और वेतन विसंगति दूर करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि हर महीने की 5 तारीख से पहले मानदेय भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई तो कलेक्टोरेट और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने आंदोलन किया जाएगा।

ढाई महीने से मानदेय लंबित होने का दावा

कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने 18 अगस्त 2026 को जिला कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि बिलासपुर जिले के बिल्हा, मस्तूरी, कोटा और तखतपुर विकासखंडों में कार्यरत स्कूल सफाई कर्मचारियों को करीब ढाई महीने से मानदेय नहीं मिला है। संघ के मुताबिक लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा के खर्च चलाने में परेशानी हो रही है।

वेतन विसंगति को लेकर भी नाराजगी

कर्मचारियों की परेशानी केवल मानदेय में देरी तक सीमित नहीं है। संघ ने बिलासपुर जिले में स्कूल सफाई कर्मचारियों को मिलने वाले मानदेय में कथित वेतन विसंगति का मुद्दा भी उठाया है। संघ का दावा है कि जिले के कर्मचारियों को प्रदेश में सबसे कम मानदेय मिल रहा है और समान प्रकृति का काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में भुगतान व्यवस्था में अंतर है।

हालांकि प्रदेश में सबसे कम मानदेय मिलने के इस दावे की स्वतंत्र या विभागीय आंकड़ों से पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह आरोप कर्मचारी संघ की ओर से ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के सामने रखा गया है।

त्योहारों के समय आर्थिक संकट

संघ का कहना है कि कर्मचारियों को समय पर मानदेय नहीं मिलने का असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है। त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है, लेकिन ऐसे समय में भी कर्मचारियों को अपने मेहनताने के लिए इंतजार करना पड़ता है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से साफ-सफाई सहित अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद मानदेय भुगतान में अनिश्चितता बनी हुई है।

5 तारीख तक भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन

कर्मचारी कल्याण संघ ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि नियमानुसार प्रत्येक माह की 5 तारीख से पहले मानदेय का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

संघ के मुताबिक मांगों का समाधान नहीं होने पर कलेक्टर कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

कर्मचारियों का सवाल—काम नियमित तो भुगतान में देरी क्यों?

स्कूलों की स्वच्छता व्यवस्था में स्कूल सफाई कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे नियमित रूप से काम लिया जा रहा है तो उनके मानदेय के भुगतान में महीनों की देरी क्यों हो रही है?

इसके साथ ही कर्मचारी संघ ने मानदेय में कथित असमानता की समीक्षा कर उचित भुगतान व्यवस्था लागू करने की मांग की है। कर्मचारियों की मांग है कि लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए और भविष्य में भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब कर्मचारियों की नजर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर है। यदि लंबित मानदेय का जल्द भुगतान नहीं होता और वेतन विसंगति के मुद्दे पर ठोस पहल नहीं की जाती है, तो आने वाले दिनों में मामला आंदोलन का रूप ले सकता है।

ढाई महीने से मानदेय लंबित होने का दावा, वेतन विसंगति का आरोप और आंदोलन की चेतावनी के बाद स्कूल सफाई कर्मचारियों का यह मामला अब जिला प्रशासन के लिए अहम मुद्दा बन गया है।

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