सुशासन के दावों के बीच चंगेरी में पेयजल संकट गहराया, शासन की मंशा पर पंचायत सचिव की कार्यशैली भारी जनपद सीईओ के आदेश के बावजूद सचिव की लापरवाही सर चढ़कर बोल रहा, प्रशासनिक कसावट पर बडा सवाल

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मरवाही। छत्तीसगढ़ सरकार जहां ग्रामीण विकास, सुशासन और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने लगातार प्रयासरत है, वहीं जिला गौरेला–पेंड्रा–मरवाही के दूरस्थ ग्राम पंचायत चंगेरी में पंचायत स्तर की लापरवाही शासन की मंशा पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। भीषण गर्मी के इस दौर में गांव के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर लगातार निर्देश और प्रयास किए जाने की बात सामने आ रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में सुशासन और संवेदनशील प्रशासन को मजबूत करने के लिए “सुशासन तिहार” जैसे अभियान शुरू किए हैं, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। जिला गौरेला–पेंड्रा–मरवाही में भी जिला कलेक्टर डां संतोष कुमार देवागंन के नेतृत्व में प्रशासन लगातार जनसमस्याओं के निराकरण को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से पेयजल संकट को लेकर जिला प्रशासन समय-समय पर अधिकारियों और पंचायतों को आवश्यक निर्देश जारी कर रहा है।
इसके बावजूद मछुआ बाहुल्य ग्राम पंचायत चंगेरी में हालात बद से बदतर बने हुए हैं। गांव के कई मोहल्लों में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। नलजल योजना कई स्थानों पर बंद पड़ी है, जबकि हैंडपंपों से भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा। आलम यह है कि महिलाएं सिर पर बर्तन लेकर दूर-दूर तक पानी की तलाश में भटक रही हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव दिलीप पडवार की उदासीनता, लापरवाही और लेट-लतीफी के कारण यह संकट लगातार गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि पंचायत स्तर पर समय रहते आवश्यक पहल नहीं की गई, जिसके कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव कार्यालय में बैठकर केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करने में व्यस्त हैं, जबकि जमीनी समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा।

इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच राधा बाई लगातार सक्रिय भूमिका निभाती नजर आईं। ग्रामीणों के अनुसार सरपंच द्वारा कई बार पंचायत बैठक बुलाकर पेयजल संकट के समाधान का प्रयास किया गया। संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी गई तथा सचिव को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने निर्देशित भी किया गया। लेकिन पंचायत सचिव की धीमी कार्यप्रणाली और उदासीन रवैये के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार मरवाही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा भी चंगेरी में पेयजल संकट को गंभीरता से लेते हुए पंचायत सचिव को तत्काल आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद सचिव स्तर पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद सीईओ के निर्देशों को भी नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पंचायत स्तर पर जवाबदेही की कमी किस हद तक बढ़ चुकी है।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि शासन और प्रशासन जहां गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनने का प्रयास कर रहा है, वहीं कुछ जिम्मेदार कर्मचारी शासन की छवि खराब करने में लगे हुए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्यवाही होती और पंचायत सचिव सक्रियता दिखाते, तो आज गांव को इस भयावह जल संकट का सामना नहीं करना पड़ता।

सबसे गंभीर बात यह है कि जब शासन “सुशासन तिहार” के माध्यम से जनता का विश्वास जीतने का प्रयास कर रहा है, तब ऐसे मामलों में अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही आमजन के बीच गलत संदेश देती है। लोग यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि यदि बार-बार शिकायत, जनप्रतिनिधियों के प्रयास और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद मूलभूत समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा, तो आखिर सुशासन का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक कैसे पहुंचेगा? ऐसी कार्यशैली न केवल शासन की मंशा को कमजोर करती है, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी प्रभावित करती है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। हालात इतने खराब हैं कि कई परिवार निजी साधनों से पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने अब दो वक्त की रोटी के साथ पानी की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है, जनपद सीईओ निर्देश जारी कर रहे हैं, सरपंच प्रयासरत हैं, तब आखिर पंचायत सचिव स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही क्यों? क्या ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों को लेकर जिम्मेदार कर्मचारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं होगी?

चंगेरी का यह मामला केवल एक पंचायत का मुद्दा नहीं, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना है जहां शासन की अच्छी योजनाएं और प्रशासन की मंशा कुछ लापरवाह कर्मचारियों की कार्यशैली के कारण धरातल पर दम तोड़ती नजर आती हैं। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्यवाही पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर जिम्मेदारों पर कड़ी कार्यवाही करेगा, ताकि भविष्य में किसी भी गांव को पेयजल जैसी मूलभूत समस्या के लिए इस तरह परेशान न होना पड़े।

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