चार दशक बाद नक्सलगढ़ के सुदूर मोसला गांव में पहली बार शान से लहराया तिरंगा

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बीजापुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर के सुदूर और कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहे इलाकों में बदलाव की तस्वीर देखने को मिली। बीजापुर जिले के विकासखंड बीजापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कैका के सुदूर मोसला गांव में आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा गांव पहुंचे और ग्रामीणों एवं स्कूली विद्यार्थियों के साथ ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस मनाया।

बताया गया कि बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 92 गांवों में इस वर्ष पहली बार तिरंगा फहराया गया। इन गांवों में आजादी के बाद से अब तक राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर नहीं मिला था। मोसला में हुआ ध्वजारोहण इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण तस्वीर बनकर सामने आया।

दुर्गम रास्तों और तेज बहाव वाले नालों को पार कर पहुंचे टिकरिहा

मोसला पहुंचने के लिए राहुल योगराज टिकरिहा को दुर्गम रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। बारिश के कारण कई जगह सड़कें दलदल और कीचड़ में तब्दील थीं। उबड़-खाबड़ रास्तों के साथ तेज बहाव वाले नालों को पार करते हुए वे मोटरसाइकिल से आगे बढ़े। कई स्थानों पर बाइक दलदल में फंसने के बाद पैदल भी रास्ता तय करना पड़ा।

इसके बावजूद तिरंगा फहराने और ग्रामीणों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने का संकल्प कायम रहा। करीब चार दशक बाद किसी भाजपा नेता के इस दुर्गम क्षेत्र में पहुंचने को ग्रामीणों के लिए उत्साह और विश्वास का संदेश बताया गया।

ग्रामीणों और विद्यार्थियों के साथ मनाया स्वतंत्रता दिवस

मोसला गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में ध्वजारोहण हुआ। तिरंगा फहराते ही पूरा परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। पहली बार अपने गांव में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने को लेकर ग्रामीणों और बच्चों में उत्साह देखने को मिला।

इस अवसर पर राहुल योगराज टिकरिहा ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और शांति की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिन क्षेत्रों में दशकों तक तिरंगा पहुंचना मुश्किल था, वहां आज राष्ट्रध्वज सम्मान के साथ लहरा रहा है। यह बदलते बस्तर और मुख्यधारा से जुड़ते गांवों की तस्वीर है।

14 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने तिरंगे को दी सलामी

कार्यक्रम के दौरान भावुक कर देने वाला दृश्य भी देखने को मिला। मोसला गांव के 14 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होकर तिरंगे को सलामी दी।

कभी हिंसा और भय के साये में रहे क्षेत्र में मुख्यधारा में लौट चुके लोगों का राष्ट्रीय ध्वज के सामने खड़ा होना शांति और बदलाव का महत्वपूर्ण संदेश माना गया।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास की नई तस्वीर

मोसला में पहली बार तिरंगा फहराया जाना केवल स्वतंत्रता दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र में बदलते हालात का प्रतीक भी बना। नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकल रहे इलाकों में सुरक्षा के साथ विकास गतिविधियों के विस्तार की तस्वीर सामने आ रही है।

सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ ग्रामीणों में शासन और व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ने की बात कही जा रही है। स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार तिरंगे के नीचे खड़े ग्रामीणों और बच्चों के लिए यह अवसर लंबे इंतजार के बाद मिले आजादी के उत्सव जैसा रहा।

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