फर्जीवाड़े के आरोपों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, अज्ञेय नगर में अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा निरस्त

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अभिषेक कुमार पाण्डेय

रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

आवासीय प्लॉट को रास्ता दिखाकर जोड़ा, चार मंजिल की अनुमति में छह मंजिल का निर्माण सामने आया; जांच समिति की रिपोर्ट के बाद टीएंडसीपी की कार्रवाई

बिलासपुर। नक्शे में कथित हेरफेर और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर बहुमंजिला निर्माण किए जाने के मामले में नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) संचालनालय ने कड़ा कदम उठाया है। बिलासपुर के अज्ञेय नगर में मेसर्स अनंत रियल्टी के बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट को जारी विकास अनुज्ञा (Development Permission) को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत तत्काल प्रभाव से प्रतिसंहृत कर दिया गया है।

आयुक्त अवनीश शरण के निर्देश पर हुई जांच और कार्रवाई के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

शिकायत के बाद गठित हुई जांच समिति

मामले में शिकायत मिलने के बाद चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। समिति में विनीत नायर, रोहित गुप्ता, प्रतीक दीक्षित और आलोक त्रिपाठी शामिल थे।

समिति ने परियोजना से संबंधित दस्तावेजों और लेआउट की जांच की। जांच में 25 जून 2025 को क्षेत्रीय कार्यालय से जारी विकास अनुज्ञा में कई गंभीर विसंगतियां सामने आने की बात कही गई।

आवासीय प्लॉट को रास्ता बताकर नए लेआउट में जोड़ा

जांच के अनुसार खसरा नंबर 15/1, 157/26 और 158/30 की कुल 0.62 एकड़ भूमि पर परियोजना विकसित की जा रही थी। आरोप है कि पुराने लेआउट में मौजूद एक आवासीय प्लॉट को रास्ते के रूप में दर्शाकर नए लेआउट में शामिल कर लिया गया।

जांच समिति के मुताबिक नियमों के तहत आवासीय प्लॉट का इस तरह दूसरी भूमि में विलय अनुमन्य नहीं है। साथ ही वर्ष 1989 के मूल अभिन्यास में भी इस संबंध में कोई वैध संशोधन दर्ज नहीं पाया गया।

चार मंजिल की अनुमति, छह मंजिल का निर्माण सामने आया

जांच में परियोजना के मंजिलों की संख्या को लेकर भी गंभीर अंतर सामने आया। स्वीकृत विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉकों में चार-चार मंजिल के हिसाब से कुल 60 फ्लैट दर्शाए गए थे। वहीं जांच के दौरान लेआउट के कई हिस्सों में छह मंजिल के निर्माण का उल्लेख सामने आया।

समिति ने माना कि मंजिलों की संख्या में इस अंतर का प्रभाव परियोजना में निर्धारित EWS और LIG आवासों की गणना पर भी पड़ सकता है।

‘तकनीकी सलाहकार की गलती’ का तर्क नहीं माना

सुनवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन की ओर से विसंगतियों को तकनीकी सलाहकार की टाइपिंग या नंबरिंग संबंधी गलती बताया गया। हालांकि जांच समिति ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

समिति के अनुसार लेआउट दस्तावेजों पर डेवलपर के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों और महत्वपूर्ण तथ्यों के उल्लेख में हुई गलती की जिम्मेदारी से डेवलपर पूरी तरह अलग नहीं हो सकता।

नोटिस और सुनवाई के बाद विकास अनुज्ञा निरस्त

कंपनी को जारी नोटिस और 7 अगस्त 2026 को हुई व्यक्तिगत सुनवाई के बाद समिति ने कंपनी के जवाब को असंतोषजनक माना। इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर की अनुशंसा तथा विकास अनुज्ञा की शर्त क्रमांक 29 और 31 के उल्लंघन को आधार बनाते हुए 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को निरस्त कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद निर्माण की वैधता पर सवाल

विकास अनुज्ञा निरस्त होने के बाद अज्ञेय नगर स्थित उक्त परियोजना के संबंध में आगे का निर्माण वैधानिक अनुमति के बिना किया जाना नियमों के विपरीत होगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से बहुमंजिला निर्माण परियोजनाओं में स्वीकृत नक्शे, लेआउट और निर्माण की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

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