रायपुर/अंबिकापुर/बलरामपुर। सरगुजा और बलरामपुर जिले में कुछ शासकीय कर्मचारियों के सहारा समूह और अन्य वित्तीय संस्थाओं से एजेंट के रूप में जुड़े होने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शासकीय पद पर रहते हुए कुछ कर्मचारियों ने स्वयं एजेंट बनकर अपने परिवार और रिश्तेदारों को भी एजेंट बना दिया तथा हितग्राहियों को जानकारी दिए बिना पोस्ट ऑफिस की जगह सहारा समूह में खाते खुलवाए गए।
हितग्राहियों के करोड़ों रुपये फंसने का आरोप
शिकायतों के अनुसार, कई हितग्राहियों ने जमा राशि वापस मांगने पर एजेंटों द्वारा टालमटोल किए जाने की बात कही है। सहारा समूह में देशभर के बड़ी संख्या में निवेशकों का पैसा लंबे समय से फंसा हुआ है। सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता पाए जाने पर विभागीय स्तर पर जांच की जा सकती है।
शासकीय कर्मचारी नहीं बन सकते वित्तीय एजेंट
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम और केंद्र के सीसीएस नियमों के अनुसार शासकीय कर्मचारी किसी निजी वित्तीय संस्था के एजेंट, प्रचारक या मध्यस्थ के रूप में कार्य नहीं कर सकते। विशेषकर ऐसी संस्थाओं से जुड़ना, जिन पर नियामकीय कार्रवाई चल रही हो, सेवा आचरण के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी तक का प्रावधान
यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी कर्मचारी ने अपने पद का उपयोग कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया या धन संग्रह में भूमिका निभाई, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई और गंभीर मामलों में सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) तक की कार्रवाई हो सकती है।
निवेशकों को सतर्क रहने की अपील
प्रशासन और विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय योजना में निवेश करने से पहले संस्था की वैधता और नियामकीय स्थिति की जांच जरूर करनी चाहिए। शासकीय कर्मचारी के नाम या पद का उपयोग कर निवेश करवाने से लोगों में गलत भरोसा पैदा हो सकता है।




