चंदा वसूली के आरोपों पर आस्था गणेशोत्सव समिति का पलटवार, जमीन विवाद को बताया विवाद की जड़

Advertisement
Advertisement

अभिषेक कुमार पाण्डेय

रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

समिति पदाधिकारियों ने कैट-चेंबर के आरोपों को किया खारिज, प्रेसवार्ता में पेड़ काटने और रास्ते को लेकर विवाद का दावा

बिलासपुर। आस्था गणेशोत्सव समिति ने कैट और छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से लगाए गए जबरिया चंदा वसूली और मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। समिति के अध्यक्ष शुभम सोनी और कार्यकारी अध्यक्ष आशु अग्निहोत्री ने सोमवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विवाद की वजह चंदा नहीं, बल्कि जमीन, पेड़ काटने और रास्ते से जुड़ा मामला है।

समिति ने क्या कहा

समिति पदाधिकारियों के मुताबिक जमीन पर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। उनका दावा है कि 11 सितंबर को विवादित जमीन पर मौजूद एक पुराना पेड़ काट दिया गया था। इसकी जानकारी मिलने के बाद 17 सितंबर को संबंधित व्यापारी से बातचीत करने के लिए वे दुकान पहुंचे थे।

समिति का कहना है कि उक्त पेड़ उनके पिता के समय से वहां मौजूद था। इसी मुद्दे पर बातचीत के दौरान कथित तौर पर गाली-गलौज और हाथापाई की स्थिति बनी। पदाधिकारियों ने दावा किया कि इस दौरान उनके हाथ, गले और छाती में चोट आई।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की और इसके बजाय उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई।

चंदे की रसीद को लेकर दी सफाई

समिति ने जबरिया चंदा वसूली के आरोपों पर रसीद का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा। पदाधिकारियों के अनुसार जिस रसीद को विवाद से जोड़ा जा रहा है, वह गणेशोत्सव समिति की नहीं बल्कि दुर्गा समिति की रसीद थी।

समिति का दावा है कि गणेशोत्सव के लिए संबंधित व्यापारी से 5,500 रुपये पहले ही प्राप्त हो चुके थे, जबकि विवाद से करीब एक घंटे पहले ही यह राशि ली जा चुकी थी। वहीं दुर्गा समिति की रसीद में राशि का कॉलम खाली होने की बात कही गई। पदाधिकारियों के अनुसार व्यापारियों से चर्चा के बाद राशि दर्ज किए जाने की बात होने के कारण उस समय रकम नहीं लिखी गई थी।

पूरी CCTV रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने की मांग

समिति पदाधिकारियों ने विवाद से जुड़े पूरे CCTV फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि सामने आया वीडियो कथित तौर पर पूरा घटनाक्रम नहीं दिखाता।

उन्होंने कहा कि दुकान की पूरी रिकॉर्डिंग और ऑडियो सामने आने से यह स्पष्ट हो सकता है कि विवाद की शुरुआत किस मुद्दे से हुई और घटनाक्रम में क्या-क्या हुआ।

जमीन, पेड़ और रास्ते को लेकर भी उठाए सवाल

प्रेसवार्ता में समिति ने विवादित जमीन, रास्ते और पेड़ काटे जाने को लेकर भी कई दावे किए। पदाधिकारियों के अनुसार विवादित भूमि में उनका हिस्सा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्लाटिंग से पहले नाले के लिए जमीन का एक हिस्सा शासन को दिया गया था, जिसका बाद में रास्ते के रूप में उपयोग किए जाने का आरोप है।

समिति ने नए निर्माण वाले हिस्से में पेड़ काटने, मुरुम डालने और रास्ता तैयार करने को लेकर भी सवाल उठाए।

निष्पक्ष जांच की मांग

आस्था गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने पूरे मामले की पुलिस और राजस्व विभाग के स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े विवाद को चंदा वसूली के आरोप से जोड़कर समिति की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, पूरे विवाद में लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच और दोनों पक्षों के उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

Advertisement
Share This Article