खाकी के पहरे के बीच कैसे लहलहा उठी संदिग्ध वनस्पति ?

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जूटमिल थाने की दहलीज पर उगे रहस्यमयी पौधों ने खड़े किए सवाल?

रायगढ़@दैनिक खबर सार :- शहर का व्यस्ततम इलाका और कानून व्यवस्था की चौखट माना जाने वाला जूटमिल थाना। जहां दिन-रात वर्दीधारियों की चौकसी रहती है, फरियादियों की आवाजाही बनी रहती है और अपराध पर लगाम लगाने के दावे किए जाते हैं, ठीक उसी परिसर के बाहरी हिस्से में इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा आम राहगीरों और स्थानीय लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। थाने की बाउंड्री और आसपास की खुली जमीन पर कुछ ऐसे पौधे लहलहाते दिखाई दे रहे हैं, जिनकी बनावट और पत्तियों का स्वरूप पहली ही नजर में किसी प्रतिबंधित मादक पौधे यानी गांजे के पेड़ की याद दिला देता है। हालांकि यह वास्तव में वही पौधा है या केवल उससे मिलती-जुलती कोई जंगली वनस्पति, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल किसी स्तर पर नहीं हुई है, लेकिन थाने के इतने करीब इनकी मौजूदगी ने कई गंभीर और अनसुलझे सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

कानून की दहलीज पर कौतूहल का केंद्र..

आमतौर पर किसी भी थाने के इर्द-गिर्द का इलाका सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। वहां जमीन के हर हिस्से पर व्यवस्था की नजर होती है। ऐसे में जूटमिल थाने के मुहाने पर इस तरह के पौधों का उगना और धीरे-धीरे बड़ा हो जाना लोगों को हैरान कर रहा है। यहां कोई एक-दो पौधे नहीं, बल्कि परिसर के बाहर अलग-अलग कोनों और खाली पड़ी जगहों पर ऐसे कई पौधे दिखाई दे रहे हैं। जो भी व्यक्ति सड़क से गुजरते हुए अनायास इन पर नजर डालता है, उसके कदम ठिठक जाते हैं। लोग आपस में दबी जुबान में चर्चा करने लगते हैं कि आखिर जिन वनस्पतियों को नष्ट करने और जिनके अवैध कारोबार को रोकने के लिए पुलिस लगातार अभियान चलाती है, वैसी ही बनावट वाला पौधा खुद पुलिस की नाक के नीचे कैसे फल-फूल रहा है।

बीज का सफर: संयोग, लापरवाही या कुछ और?

प्राकृतिक और वानस्पतिक नियमों के अनुसार कोई भी विशिष्ट पौधा उसी स्थान पर उगता है जहां या तो उसकी योजनाबद्ध तरीके से खेती की जाए, या फिर उसके बीज किसी माध्यम से गिरे हों। सामान्य तौर पर ऐसे पौधे उन रास्तों या ठिकानों के आसपास देखने को मिलते हैं जहां से इस तरह की सामग्री की ढुलाई या संदिग्ध आवाजाही होती रही हो। जूटमिल क्षेत्र में न तो ऐसी किसी खेती की कोई गुंजाइश है और न ही औपचारिक तौर पर ऐसा कोई लेन-देन संभव है। ऐसे में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही बनकर उभरा है कि इन पौधों के बीज आखिर यहां तक पहुंचे कैसे। क्या जब्त किए गए किसी पुराने माल की आवाजाही के दौरान यह बीज यहां गिरे, या फिर किसी अज्ञात व्यक्ति की आवाजाही के चलते यह स्थिति बनी? स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन ठोस जवाब किसी के पास नहीं है।

जांच और तकनीकी परीक्षण की दरकार..

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू निष्पक्षता और वैज्ञानिक पुष्टि का है। वनस्पति जगत में कई ऐसी प्रजातियां और खरपतवार पाए जाते हैं जिनकी पत्तियां और शाखाएं दिखने में हूबहू प्रतिबंधित पौधों जैसी नजर आती हैं, पर वे जहरीले या नशीले नहीं होते। यही वजह है कि जब तक वन विभाग या कृषि वैज्ञानिक इन पौधों का मौके पर मुआयना कर इनके नमूनों की जांच नहीं करते, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब देखना यह होगा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए क्या वन विभाग अथवा संबंधित प्रशासनिक तंत्र आगे आकर इन पौधों की वास्तविक प्रजाति की शिनाख्त कराएगा, ताकि शहर में फैल रही तरह-तरह की चर्चाओं और संशय के माहौल पर पूर्णविराम लग सके।

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