शिवा मेडिसिटी अस्पताल ने आरोपों का किया खंडन, मानहानि की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

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प्रबंधन का दावा—गंभीर अवस्था में भर्ती था मरीज, परिजनों ने लिखित में दी थी DNR की सहमति

पत्रकार गोविन्द शर्मा की रिपोर्ट

बिलासपुर। शिवा मेडिसिटी अस्पताल के खिलाफ कुछ मीडिया पोर्टल्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित खबरों को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए आरोपों का खंडन किया है। प्रबंधन ने संबंधित खबरों को तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए कहा है कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि और संबंधित पक्ष का पक्ष जानना जरूरी है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले में कानूनी नोटिस जारी करने तथा आरोप वापस नहीं लिए जाने पर मानहानि की कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।

मरीज की हालत बेहद गंभीर होने का दावा

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, संबंधित मरीज स्टेज-4 पैंक्रियाटिक कैंसर (अग्न्याशय का उन्नत अवस्था का कैंसर) और गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन जैसी गंभीर स्थिति से पीड़ित थे। प्रबंधन का दावा है कि मुंबई के बड़े अस्पतालों में भी इलाज की सीमाएं बताई गई थीं, जिसके बाद मरीज को वापस लाया गया था।

प्रबंधन के मुताबिक, गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन के उपचार के लिए अपोलो अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद मरीज की स्थिति और नाजुक हो गई थी। आर्थिक कारणों से परिजनों ने मरीज को शिवा मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया था।

भर्ती के समय भी नाजुक थी स्थिति

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज को भर्ती किए जाने के समय उनका ब्लड प्रेशर और पल्स रिकॉर्ड नहीं हो पा रहे थे तथा श्वसन क्रिया भी असामान्य थी। प्रबंधन के अनुसार, परिजनों को शुरुआत में ही मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दे दी गई थी और किसी भी अनहोनी की आशंका से अवगत कराया गया था।

DNR सहमति और पेलिएटिव केयर का हवाला

प्रबंधन ने अपने पक्ष में बताया कि मरीज के परिजनों ने लिखित रूप से DNR (Do Not Resuscitate) सहमति दी थी। अस्पताल के अनुसार, इस सहमति में वेंटिलेटर और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) से इनकार किया गया था।

अस्पताल प्रबंधन का यह भी कहना है कि मरीज को पेलिएटिव केयर यानी अंतिम अवस्था में दर्द और तकलीफ कम करने वाली सहायक चिकित्सा के उद्देश्य से भर्ती किया गया था। प्रबंधन के मुताबिक, उपचार का उद्देश्य मरीज को अंतिम समय में राहत प्रदान करना था।

इंजेक्शन से मौत के दावे पर उठाए सवाल

अस्पताल प्रबंधन ने मरीज की मौत को किसी इंजेक्शन से जोड़ने संबंधी दावों पर भी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि चिकित्सकीय जांच, पोस्टमार्टम या अन्य आधिकारिक प्रमाणों के बिना मौत का कारण किसी इंजेक्शन को बताना उचित नहीं है। प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मामले में निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों और चिकित्सकीय साक्ष्यों की जांच होनी चाहिए।

मीडिया पोर्टल्स को कानूनी नोटिस देने का दावा

अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि शिवा मेडिसिटी में 24 घंटे क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ उपलब्ध रहते हैं। प्रबंधन के अनुसार, संबंधित मीडिया पोर्टल्स को वकील के माध्यम से नोटिस भेजे गए हैं। यदि कथित मानहानिकारक सामग्री वापस नहीं ली जाती और संबंधित खबरें नहीं हटाई जातीं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंधन ने निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान से संबंधित गंभीर आरोपों को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब लेना आवश्यक है।

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