दोनों गुटों को चार सप्ताह में अपनी दलीलें और दस्तावेज दाखिल करने होंगे; आयोग के फैसले के लिए तय हुई समयसीमा
नई दिल्ली। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समयसीमा में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और आवश्यक दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को विवाद पर तीन महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में चुनाव आयोग के उस अंतरिम निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसके तहत विवाद के अंतिम निपटारे तक TMC के मूल नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को रोक दिया गया था।
चार सप्ताह में पूरी करनी होगी पक्ष रखने की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों पक्षों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी लिखित दलीलें, जवाब और संबंधित साक्ष्य दाखिल करने की प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पक्ष की ओर से जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से आवश्यक जवाब और दस्तावेज दाखिल किए जाने बाकी थे। अदालत ने इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चार सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।
इसके बाद तीन महीने में आयोग को देना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज दाखिल होने के बाद चुनाव आयोग को विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा। इस तरह पक्षों को चार सप्ताह और उसके बाद आयोग को तीन महीने की अवधि मिलने से पूरी प्रक्रिया के लिए लगभग चार महीने की समयसीमा तय हुई है।
चुनाव आयोग की ओर से मामले के निपटारे के लिए छह महीने का समय मांगे जाने की रिपोर्ट है, लेकिन अदालत ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना। अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।
