ड्राइवर यूनियन के नाम पर अवैध वसूली का खुला खेल: ट्रैफिक पुलिस ने दबोचे गिरोह के शातिर, जूटमिल थाने को सौंपा..

खाकी की साख पर सवाल: क्या फिर 151 की रस्म अदायगी कर छोड़ दिए जाएंगे आदतन वसूलीबाज, या इस बार नपेगी गैर-जमानती धाराओं में गर्दन?

रायगढ़@दैनिक खबर सार :- औद्योगिक नगरी में तथाकथित ड्राइवर यूनियन की आड़ में लंबे समय से बेखौफ चल रहे अवैध वसूली के संगठित सिंडिकेट पर आखिरकार ट्रैफिक पुलिस ने शिकंजा कसा है। जूटमिल क्षेत्र में चालकों से खुलेआम धमकाकर चौथ वसूली कर रहे दो से तीन शातिरों को ट्रैफिक पुलिस ने रंगे हाथ धर दबोचा और आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए जूटमिल थाना पुलिस के हवाले कर दिया। इस धरपकड़ के बाद अब पुलिस महकमे के रुख पर शहर की नजरें टिक गई हैं कि क्या आदतन अपराधियों पर नकेल कसी जाएगी या फिर पुराने ढर्रे पर मामूली धाराओं का लेप लगाकर इन्हें दोबारा सड़क पर लूटने के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा।

स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस गिरोह के तार बेहद गहरे हैं। ये तथाकथित यूनियन संचालक किसी एक जगह पर टिककर नहीं, बल्कि जूटमिल क्षेत्र के अलग-अलग सुनसान और व्यस्त मोड़ों पर अपना ठिकाना बदलकर भारी वाहनों व बाहरी चालकों को आतंकित करते हैं। यूनियन की रसीद या सदस्यता के नाम पर चलने वाली इस गुंडागर्दी से क्षेत्र के वाहन चालक त्रस्त आ चुके हैं।

सबसे बड़ा सुलगता सवाल खाकी की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। पूर्व में भी जब-जब इन वसूलीबाजों की शिकायतें हुईं, पुलिस ने महज धारा 151 (शांति भंग की आशंका) जैसी हल्की प्रतिबंधात्मक धाराओं में चालान पेश कर अपनी औपचारिकता पूरी कर ली। नतीजा यह रहा कि मुचलके पर रिहा होते ही ये आरोपी अगले ही दिन चौगुने दुस्साहस के साथ सड़कों पर अपनी वसूली की दुकान सजा लेते हैं।

कानूनी जानकारों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब आरोपियों का आपराधिक इतिहास और आदतन रंगदारी वसूलना पहले से प्रमाणित है, तो फिर इन पर उगाही, भयादोहन और संगठित गिरोह चलाने जैसी गैर-जमानती और सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज क्यों नहीं किया जाता? फिलहाल जूटमिल पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन यह कार्रवाई महज खानापूर्ति साबित होगी या इस बार इन वसूलीबाजों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।

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