हाईकोर्ट के सामने लंबित मामले की जानकारी पर उठे सवाल, रिव्यू पिटीशन में सामने आया पुराना आदेश

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अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

कमिश्नर के स्तर पर पहले ही निपट चुके मामले पर 30 दिन में फैसला करने का निर्देश जारी हुआ था, पुनर्विचार याचिका के बाद हाईकोर्ट ने आदेश के संबंधित पैराग्राफ हटाए

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक राजस्व मामले की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड और प्रस्तुत तथ्यों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति सामने आई। जिस मामले को हाईकोर्ट के समक्ष लंबित बताया गया था, उसका निपटारा बिलासपुर संभाग के कमिश्नर न्यायालय द्वारा करीब नौ महीने पहले ही किए जाने की जानकारी पुनर्विचार याचिका के दौरान सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश के संबंधित हिस्सों को विलोपित कर दिया और सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं को अदालत के समक्ष तथ्यों को पूरी सावधानी और स्पष्टता के साथ रखने की हिदायत दी।

30 दिन में राजस्व अपील के निपटारे का दिया गया था निर्देश

मामला राजस्व विवाद से संबंधित बताया गया है। हाईकोर्ट ने 6 मई को पारित आदेश में बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को संबंधित राजस्व अपील का निपटारा 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया था।

बाद में राज्य शासन की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका में बताया गया कि जिस राजस्व प्रकरण को हाईकोर्ट के समक्ष लंबित बताया गया था, उसका निपटारा कमिश्नर न्यायालय द्वारा 6 अगस्त 2025 को ही किया जा चुका था।

राज्य शासन की रिव्यू पिटीशन से सामने आया तथ्य

कमिश्नर कार्यालय तक हाईकोर्ट का आदेश पहुंचने के बाद राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता सब्यसाची चौबे के माध्यम से पुनर्विचार याचिका दायर की गई। इसमें अदालत को बताया गया कि संबंधित प्रकरण का आदेश पहले ही पारित हो चुका था।

राज्य शासन ने हाईकोर्ट के 6 मई के आदेश के पैराग्राफ 8, 9 और 10 को हटाने का अनुरोध किया। शासन की ओर से यह भी दलील दी गई कि पूर्व में पारित आदेश की जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद मामले को लंबित बताकर आदेश प्राप्त हुआ।

हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश के तीन पैराग्राफ किए विलोपित

मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. श्रीवास्तव की एकलपीठ के समक्ष हुई। रिकॉर्ड और प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने अपने पूर्व आदेश के पैराग्राफ 8, 9 और 10 को विलोपित कर दिया।

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पक्ष कमिश्नर द्वारा 6 अगस्त 2025 को पारित मूल आदेश से असंतुष्ट हैं, तो वे कानून के अनुसार सक्षम मंच के समक्ष उसे चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।

अधिवक्ताओं को तथ्यों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं को अदालत के समक्ष वास्तविक और पूर्ण तथ्यों को रखने के महत्व पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि अदालत के सामने गलत या अधूरी जानकारी आने से प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

जानबूझकर गलती या लापरवाही, स्थिति पर बहस

इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पहले से निपट चुके प्रकरण को लंबित बताने के पीछे तथ्यात्मक चूक कैसे हुई। हालांकि, उपलब्ध घटनाक्रम के आधार पर इसे जानबूझकर अदालत को गुमराह करने की कार्रवाई बताना उचित नहीं होगा। इस संबंध में अदालत के आदेश में जो तथ्य और टिप्पणियां दर्ज हैं, वही अंतिम आधार माने जाएंगे।

मामले ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि न्यायालय के समक्ष किसी भी प्रकरण की वर्तमान स्थिति और पूर्व में पारित आदेशों की सही जानकारी रखना सभी पक्षों और उनके अधिवक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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