सप्तम दिवस कथा वाचक श्री अनादि जी महाराज ने सुनाए भक्ति, मित्रता और मोक्ष के प्रेरणादायी प्रसंग; ‘Zero Waste’ थीम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
जगदलपुर। धरमपुरा-जगदलपुर स्थित सौंडिक भवन, LIC रोड में श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को सप्तम दिवस संपन्न हुआ। अंतिम दिवस श्रद्धालुओं ने सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित मोक्ष और श्री सुखदेव विदाई जैसे भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण किया।
सुदामा चरित्र में दिखा कृष्ण-सुदामा की मित्रता और भक्ति का संदेश
कथा वाचक श्री अनादि जी महाराज ने श्रीमद् भागवत के विभिन्न प्रसंगों की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता के माध्यम से प्रेम, समर्पण, निस्वार्थ भक्ति और सच्चे संबंधों का महत्व श्रद्धालुओं को समझाया।
परीक्षित मोक्ष प्रसंग ने समझाया जीवन की नश्वरता
सप्तम दिवस राजा परीक्षित मोक्ष का प्रसंग भी कथा का प्रमुख आकर्षण रहा। कथा वाचक ने इस प्रसंग के माध्यम से जीवन की नश्वरता और ईश्वर भक्ति के महत्व को रेखांकित किया। श्रद्धालुओं को संदेश दिया गया कि सांसारिक जीवन के साथ आध्यात्मिक चेतना और प्रभु स्मरण को भी महत्व देना चाहिए।
सात दिवसीय कथा-वाचन चरण हुआ पूर्ण
सप्तम दिवस की कथा के साथ ही श्रीमद् भागवत कथा के सात दिवसीय कथा-वाचन चरण का समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पहुंचकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण किया और आध्यात्मिक वातावरण में सहभागिता निभाई।
‘Zero Waste’ थीम ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
आयोजन की एक खास पहल ‘Zero Waste’ थीम रही। आयोजन समिति द्वारा कथा स्थल पर प्लास्टिक के उपयोग से परहेज करते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का यह प्रयास श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय रहा।
कथा के बाद श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था
आयोजन के दौरान कथा पश्चात श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था सैंडिक समाज की ओर से की गई। आयोजन समिति ने श्रद्धालु भक्तों से सपरिवार कथा स्थल पहुंचकर धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने और पुण्य लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।
8 सितंबर को पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन
आयोजन समिति के अनुसार, 8 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 9 बजे पूर्णाहुति का आयोजन होगा। इसके बाद दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक सौंडिक भवन में भंडारा एवं महाप्रसाद वितरण किया जाएगा। समिति ने श्रद्धालुओं से इस आयोजन में शामिल होने की अपील की है।


