37 साल के सेवाकाल में 51 बार ‘नो वर्क नो पे’ की कार्रवाई, 4 बड़ी सजाओं के बाद भी नहीं सुधरा आचरण
बिलासपुर। अनुशासनहीनता और लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के मामले में बिलासपुर पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। रक्षित केंद्र बिलासपुर में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 343 दिनेश प्रधान को विभागीय जांच के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है।
विभागीय जांच में उनके खिलाफ बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर रहने से जुड़े आरोप प्रमाणित पाए गए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने मामले में अंतिम आदेश जारी करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड दिया है।
डाक ड्यूटी से लौटने में 32 दिन की देरी
विभागीय जांच के अनुसार, आरक्षक दिनेश प्रधान को 29 नवंबर 2023 को जिला बीजापुर में डाक वितरण ड्यूटी के लिए रवाना किया गया था। उन्हें निर्धारित अवधि में वापस लौटना था, लेकिन वे तय समय पर नहीं लौटे और करीब 32 दिन बाद 3 जनवरी 2024 को रक्षित केंद्र बिलासपुर पहुंचे।
प्रशिक्षण से लौटने के बाद भी नहीं दी आमद
दूसरे मामले में उन्हें पीटीएस मैनपाट पीपी कोर्स के लिए भेजा गया था। वहां असमर्थता जताए जाने के बाद वापस किए जाने के बावजूद उन्होंने बिलासपुर में अपनी आमद नहीं दी और कथित तौर पर बिना किसी सूचना के 22 दिनों तक अनुपस्थित रहे।
दोनों घटनाओं को मिलाकर विभागीय रिकॉर्ड में उनकी कुल 54 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति सामने आई।
37 साल की सेवा में कई बार हुई कार्रवाई
रिकॉर्ड के अनुसार दिनेश प्रधान 20 अगस्त 1987 को पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। विभागीय कार्रवाई के विवरण में उनके सेवाकाल के दौरान 44 इनाम, 21 छोटी और 4 बड़ी सजाएं दर्ज होने की बात कही गई है।
इसके अलावा गैरहाजिरी के मामलों में उनके वेतन पर 51 बार एलआर-24 के तहत ‘नो वर्क नो पे’ की कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है।
विभागीय जांच में आरोप पाए गए प्रमाणित
रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र गुप्ता की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में अनुपस्थिति को कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनुशासनहीनता से जोड़ा गया। इसके बाद डीएसपी अनिताप्रभा मिंज द्वारा विभागीय जांच की गई।
जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद आरक्षक को अपना पक्ष रखने के लिए अभ्यावेदन का अवसर दिया गया, लेकिन विभागीय आदेश के अनुसार वे निर्धारित प्रक्रिया में उपस्थित नहीं हुए।
SSP ने कहा- पुलिस बल में अनुशासन सर्वोपरि
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने अंतिम आदेश में पुलिस जैसे अनुशासित बल में निर्धारित कर्तव्यों और नियमों का पालन आवश्यक बताया। आदेश में आरक्षक के आचरण तथा सेवा के प्रति रवैये को देखते हुए उन्हें विभागीय सेवा के लिए अनुपयुक्त माना गया।
हालांकि, लंबी सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए उन्हें बर्खास्त करने के बजाय अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड दिया गया।
45 दिन में अपील का अवसर
आदेश के अनुसार 54 दिनों की अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को ‘नो वर्क नो पे’ के तहत निराकृत किया गया है। संबंधित आरक्षक को आदेश के विरुद्ध नियमानुसार 45 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार भी रहेगा।
रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़




