पचरी घाट पर गूंजा ‘जय गौ माता’ का जयघोष, भव्यता के साथ शुरू हुआ बिलासपुर गौ सेवा धाम

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संत गोपाल मणि जी महाराज ने गौ-महिमा का कराया भावपूर्ण बोध, अमर अग्रवाल ने किया दीप प्रज्वलन और गौ पूजन

बिलासपुर। ऐतिहासिक पचरी घाट गुरुवार को आध्यात्मिक वातावरण और गौ-सेवा के संकल्प से भक्तिमय नजर आया। अवसर था नवनिर्मित ‘बिलासपुर गौ सेवा धाम’ के भव्य शुभारंभ का। इस अवसर पर आयोजित गौ-कथा में कथाव्यास पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज ने गौ-महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को गौ संरक्षण और सेवा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ जनप्रतिनिधि और शहर के प्रबुद्ध नागरिक भी शामिल हुए।

अमर अग्रवाल ने किया दीप प्रज्वलन और गौ पूजन

कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर एवं गौ पूजन के साथ की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गौ माता का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। गौ सेवा को केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

उन्होंने पचरी घाट के समीप आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौ सेवा धाम के निर्माण को बिलासपुर के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया और इससे जुड़े सेवाभावी लोगों के प्रयासों की सराहना की।

संत गोपाल मणि जी ने बताया गौ सेवा का महत्व

व्यासपीठ से संत गोपाल मणि जी महाराज ने अपने प्रवचन में गौ माता के आध्यात्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं से गौ संरक्षण को केवल आयोजन तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

गौ-कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। कथा परिसर में समय-समय पर ‘जय गौ माता’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा।

सेवाभावी कार्यकर्ताओं के योगदान को सराहा

समारोह में गौ सेवा धाम के निर्माण और व्यवस्थाओं में योगदान देने वाले युवाओं एवं कार्यकर्ताओं के प्रयासों की अतिथियों ने सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि यह केंद्र निराश्रित और बीमार गौवंश को आश्रय उपलब्ध कराने के साथ ही समाज में गौ सेवा और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

महाआरती और महाप्रसाद के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंतिम चरण में गौ माता की विधिवत महाआरती की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान पचरी घाट का वातावरण धार्मिक आस्था, भक्ति और सेवा भावना से ओत-प्रोत रहा।

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, बिलासपुर छत्तीसगढ़

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