रतनपुर के खसरा नंबर 770/2 का मामला न्यायालय पहुंचा, पटवारी रिपोर्ट में दूसरे व्यक्ति के कब्जे का भी उल्लेख
बिलासपुर/रतनपुर, 1 सितंबर 2026। रतनपुर राजस्व मंडल के पटवारी हल्का नंबर-12 स्थित खसरा नंबर 770/2 की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक ही पिता के तीन पुत्र होने के बावजूद संबंधित राजस्व दस्तावेजों में कथित तौर पर केवल दो पुत्रों के नाम दर्ज हैं। तीसरे वारिस का नाम रिकॉर्ड में नहीं होने को लेकर अब मामला न्यायालयीन प्रक्रिया में है।

तीन वारिस, रिकॉर्ड में सिर्फ दो नाम
मामले का प्रमुख बिंदु यह है कि संबंधित जमीन को पुश्तैनी बताया जा रहा है। ऐसे में यदि मूल खातेदार के तीन पुत्र थे, तो राजस्व रिकॉर्ड में केवल दो वारिसों के नाम दर्ज होने की वजह क्या रही, यह जांच का विषय बन गया है।
क्या नाम दर्ज करने की प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई? क्या किसी वारिस की जानकारी राजस्व विभाग के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई? या फिर रिकॉर्ड तैयार करते समय किसी का नाम छूट गया? इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित दस्तावेजों और राजस्व जांच के बाद ही सामने आएगा।
न्यायालय ने संबंधित पक्षों को जारी किया नोटिस
मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। प्रकरण में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नोटिस मोहम्मद खान के छोटे पुत्र अशरफ खां, अहमद खान के पुत्र शेर खान, अहमद खान के पुत्र पीर खान तथा अहमद खान की पत्नी सुभान बी को जारी किया गया है। सभी के निवासी वार्ड क्रमांक-3, महामाया पारा बताए गए हैं।
अब न्यायालय में प्रस्तुत होने वाले जवाब और दस्तावेजों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि राजस्व रिकॉर्ड में तीसरे वारिस का नाम दर्ज नहीं होने की स्थिति कैसे बनी।
पटवारी रिपोर्ट में दूसरे व्यक्ति के कब्जे का उल्लेख
मामले को और महत्वपूर्ण बनाने वाली बात संबंधित पटवारी जांच रिपोर्ट से जुड़ी है। रिपोर्ट में वर्तमान में उक्त भूमि पर फिरत राम पटेल, निवासी कोरबा भंवर, वार्ड नंबर-1 का कब्जा होने का उल्लेख बताया गया है।
एक ओर रिकॉर्ड में दो वारिसों के नाम होने की बात सामने आ रही है, दूसरी ओर तीसरे वारिस का नाम दर्ज नहीं है और पटवारी रिपोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे का उल्लेख है। इन सभी बिंदुओं की वास्तविक स्थिति दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग
मामले में बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर खसरा नंबर 770/2 से जुड़े पुराने एवं वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
संभावित शिकायत में पुराने खसरा रिकॉर्ड, नामांतरण प्रक्रिया, वारिसान संबंधी दस्तावेज, पटवारी प्रतिवेदन और वर्तमान कब्जे से जुड़े रिकॉर्ड की क्रमवार जांच की मांग की जा सकती है, ताकि भूमि के स्वामित्व और रिकॉर्ड में दर्ज नामों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच के बाद सामने आएगा वास्तविक तथ्य
फिलहाल यह मामला केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नामों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सवालों के घेरे में है। तीसरे वारिस का नाम किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ और वर्तमान कब्जे का आधार क्या है, इसका निर्धारण न्यायालयीन प्रक्रिया एवं सक्षम राजस्व जांच के बाद ही हो सकेगा।
अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर, छत्तीसगढ़


