अनुच्छेद 142 के तहत कई FIR रद्द करने का आदेश, शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लेकर नई FIR दर्ज नहीं करने के निर्देश
नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से संबंधित छात्रों के खिलाफ दर्ज कई FIR रद्द करने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि NEET-UG पेपर लीक और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के संबंध में छात्रों के खिलाफ नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
दिल्ली के साथ तीन राज्यों में भी FIR वापस लेने का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली के अलावा असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में प्रदर्शन से संबंधित छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और तोड़फोड़ के आरोपों से जुड़े मामले इससे अलग रखे गए हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा ऐसे आरोपों में 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR जारी रहेंगी।
तीन सदस्यीय पीठ कर रही मामले की सुनवाई
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश सौरव दास ने 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च वापस लेने की जानकारी अदालत को दी।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रदर्शनकारियों के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा बनाए रखें तो सभी मुद्दों का धीरे-धीरे समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि खुले मन से बातचीत के जरिए किसी भी मुद्दे का समाधान तलाशा जा सकता है।
केंद्र और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत में बनी सहमति
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई है। इसमें तीन प्रमुख बिंदुओं पर आश्वासन दिया गया है। इनमें प्रदर्शन के संबंध में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना, भविष्य में इसी विषय को लेकर नई FIR दर्ज नहीं करना तथा प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों में मुआवजा देने का आश्वासन शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने वापस लिया इंडिया गेट मार्च
प्रदर्शनकारियों की ओर से सौरव दास ने कहा कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेश को ध्यान में रखते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च वापस लेने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने अदालत के आदेश के पालन की उम्मीद जताते हुए न्यायपालिका, दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं और सॉलिसिटर जनरल के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी प्रदर्शनकारियों के रुख को सकारात्मक और रचनात्मक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी बातचीत के दौरान सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। उनके अनुसार बातचीत के जरिए समाधान तलाशना ही बेहतर रास्ता है।
BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दायर हुई थी याचिका
दरअसल, 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के बाद तक स्थगित करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता डॉ. रिजवान ने अदालत में कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन किसी भी मार्च या प्रदर्शन के आयोजन में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
हिंसा और तोड़फोड़ के मामलों पर कार्रवाई जारी रहेगी
सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह नजर नहीं आती, जिसके आधार पर प्रस्तावित मार्च से किसी अप्रिय घटना की आशंका मानी जाए। इसके बाद केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का रास्ता खुला।
अब ताजा आदेश और प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रस्तावित मार्च वापस लिए जाने के बाद NEET-UG विवाद को लेकर टकराव कम होने के संकेत मिले हैं। अदालत ने जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े छात्रों को राहत दी है, वहीं हिंसा और तोड़फोड़ जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों को इस राहत से अलग रखा है। इससे प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कायम करने की अदालत की कोशिश भी स्पष्ट होती है।




