भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और पारिवारिक रिश्तों की मिठास से सराबोर रहा खरसिया
खरसिया। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व खरसिया में पूरे हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर सुबह से ही घर-परिवारों में उत्साह का माहौल रहा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर स्नेह और विश्वास की डोर बांधकर उनके सुख, समृद्धि एवं दीर्घायु की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट करते हुए जीवन के हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प व्यक्त किया।
तिलक, आरती और मिठाई से बढ़ी पर्व की मिठास
रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों ने भाइयों का तिलक कर आरती उतारी और विधि-विधान से राखी बांधकर उनका मुंह मीठा कराया। भाइयों ने भी बहनों को स्नेहपूर्वक उपहार देकर उनके प्रति प्रेम और सम्मान प्रकट किया। इस दौरान परिवार के सदस्यों ने एक साथ मिलकर पर्व की खुशियां साझा कीं। हंसी-खुशी, आपसी प्रेम और आत्मीय मिलन से घर-परिवार का वातावरण उल्लासमय बना रहा।
बच्चों में भी दिखा खास उत्साह
रक्षाबंधन को लेकर बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला। छोटे भाई-बहनों ने एक-दूसरे को राखी बांधी और मिठाइयों का आनंद लिया। परिवार के सदस्यों ने सामूहिक रूप से तस्वीरें खिंचवाकर पर्व के यादगार पलों को संजोया।
प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का पर्व है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है। बदलते समय के साथ पर्व मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता आज भी कायम है। यह पर्व परिवार और रिश्तों के महत्व को समझने तथा उन्हें मजबूत बनाए रखने का संदेश देता है।
रिश्तों में प्रेम और सम्मान बनाए रखना जरूरी : राकेश नारायण बंजारे
साहित्यकार एवं सामाजिक चिंतक राकेश नारायण बंजारे ने रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में भाई-बहन का संबंध सदैव आत्मीयता और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक रहा है।
उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में ऐसे पर्व हमें अपनी पारिवारिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं। रक्षाबंधन की भावना को केवल एक दिन तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष अपने रिश्तों में प्रेम, सम्मान, सहयोग और अपनत्व बनाए रखना चाहिए। यही इस पवित्र पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
रक्षाबंधन के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और परिवार में सदैव सुख-शांति, समृद्धि, प्रेम एवं भाईचारा कायम रहने की कामना की।


