शासन के आदेश को BEO बिल्हा का खुला ‘ठेंगा’! अटैचमेंट बैन के बीच ‘ऑडिट’ के नाम पर स्कूल कर्मचारी को OD पर बुलाने का आरोप

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों और कर्मचारियों के अटैचमेंट-प्रतिनियुक्ति को लेकर शासन के सख्त निर्देशों के बीच बिल्हा विकासखंड शिक्षा कार्यालय से जुड़ा एक मामला सवालों के घेरे में है। आरोप है कि अटैचमेंट पर रोक के बावजूद ‘ऑडिट में सहयोग’ के नाम पर अकलतरी स्कूल में पदस्थ कर्मचारी केशव कुमार भारद्वाज को BEO कार्यालय बुलाने का आदेश जारी किया गया है।

बताया जा रहा है कि BEO बिल्हा कार्यालय की ओर से 20 अगस्त 2026 को पत्र क्रमांक 1767/2026/बिल्हा जारी किया गया। इसमें 27 अगस्त से महालेखाकार की ऑडिट टीम के आने का हवाला देते हुए अकलतरी स्कूल के अनुभवी कर्मचारी को कार्यालयीन कार्य के लिए बुलाने की बात कही गई है। कर्मचारी को VSK ऐप में OD (On Duty) प्रदर्शित किए जाने का भी उल्लेख है।

अटैचमेंट पर रोक के बीच OD को लेकर उठे सवाल

शासन द्वारा शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने की नीति के बीच इस आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि स्कूलों में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अटैचमेंट समाप्त किए जा रहे हैं, तो ऑडिट के नाम पर स्कूल से कर्मचारी को BEO कार्यालय बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

हालांकि, OD और अटैचमेंट की प्रशासनिक स्थिति एक जैसी नहीं होती, इसलिए इस मामले में संबंधित विभाग के आदेश और नियमों के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। BEO कार्यालय या जिला शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

अकलतरी स्कूल की व्यवस्था पर भी सवाल

शिकायत और आरोपों में यह भी सवाल उठाया गया है कि स्कूल से अनुभवी कर्मचारी को कार्यालयीन कार्य के लिए बुलाए जाने से वहां की व्यवस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा। यदि कर्मचारी की आवश्यकता स्कूल में है, तो उसे कार्यालय में बुलाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

URC वासुदेव पाण्डेय की प्रतिनियुक्ति पर भी उठे सवाल

मामले में बिल्हा ब्लॉक के URC वासुदेव पाण्डेय की वर्ष 2024 की प्रतिनियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने या उसकी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद वे कार्यालय में बने हुए हैं। हालांकि, इस संबंध में नियुक्ति एवं प्रतिनियुक्ति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

RTI आवेदन और प्रथम अपील को लेकर भी विवाद

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि जनसूचना अधिकारी के रूप में जानकारी मांगे जाने के बावजूद अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

कलेक्टर और DEO से कार्रवाई की मांग

पूरे मामले को लेकर अब जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ता पक्ष चाहता है कि BEO कार्यालय से जारी आदेश की जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शासन के अटैचमेंट संबंधी निर्देशों के तहत यह आदेश नियमसम्मत है या नहीं।

साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

रिपोर्टर: अभिषेक कुमार पाण्डेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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