अभिषेक कुमार पाण्डेय
संवाददाता, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
बिलासपुर। सेवानिवृत्ति के बाद पुराने मामलों को लेकर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने रायपुर केंद्रीय जेल के पूर्व जेल अधीक्षक के खिलाफ जारी वित्तीय वसूली और विभागीय जांच के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि निर्धारित कानूनी समय-सीमा के बाद पुराने मामले को आधार बनाकर सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
चार साल पुराने मामले को लेकर शुरू हुई थी कार्रवाई
मामला रायपुर केंद्रीय जेल के पूर्व जेल अधीक्षक से जुड़ा है। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने उनके सेवाकाल से संबंधित पुराने मामले की जांच शुरू की और कथित वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए पेंशनरी लाभों से वसूली का आदेश जारी किया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए पूर्व जेल अधीक्षक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
पेंशन नियमों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 9 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। तर्क दिया गया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ ऐसी घटना को लेकर विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती, जो निर्धारित चार वर्ष की समय-सीमा से अधिक पुरानी हो।
याचिका में यह भी कहा गया कि सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच शुरू करने के लिए नियमों में निर्धारित प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति का पालन आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने वसूली आदेश किया निरस्त
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने विभाग की कार्रवाई को नियमों के अनुरूप नहीं माना। अदालत ने पूर्व जेल अधीक्षक के खिलाफ जारी वित्तीय वसूली के आदेश को निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने संबंधित विभाग को याचिकाकर्ता के रोके गए पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को नियमानुसार जारी करने के निर्देश भी दिए।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अहम फैसला
हाईकोर्ट के इस निर्णय को सेवानिवृत्त शासकीय कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले से यह स्पष्ट होता है कि सेवानिवृत्ति के बाद पुराने मामलों में कार्रवाई करते समय विभागों को पेंशन नियमों में निर्धारित समय-सीमा और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।


