रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय
ब्यूरो चीफ, बिलासपुर
झांसी। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कोच मिड-लाइफ रिहेबिलिटेशन वर्कशॉप (CMLR), झांसी ने नई पहल की है। वर्कशॉप के तकनीकी कर्मचारियों ने ललितपुर जिले के माताटीला, जीरोन और जखोरा तथा दतिया जिले के बसई स्टेशन पर मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार कर स्थापित किए हैं। ये सभी NSG-6 श्रेणी के स्टेशन हैं।
पुराने कोच पार्ट्स का किया गया उपयोग
इस पहल की खास बात यह है कि मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार करने में कोचों की पीरियोडिक ओवरहॉलिंग के दौरान निकलने वाले उपयोगी और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है। इनमें फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (FRP) टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक, पानी की टंकियां और कोच से प्राप्त अन्य पुन: उपयोग योग्य सामग्री शामिल है।
इन सामानों को सीधे कबाड़ में भेजने के बजाय पहले उनकी जांच, सफाई और आवश्यक मरम्मत की गई। जरूरत के अनुसार उनमें सुधार कर दोबारा उपयोग के योग्य बनाया गया। इससे रेलवे संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को भी बढ़ावा मिला है।
वर्कशॉप के कर्मचारियों ने तैयार किए टॉयलेट
मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट तैयार करने और स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया CMLR वर्कशॉप के तकनीकी स्टाफ ने अपने स्तर पर पूरी की। इसमें FRP टॉयलेट मॉड्यूल, बायो-टैंक और पानी की टंकियों की जांच, आवश्यक मरम्मत, सपोर्ट स्ट्रक्चर तैयार करना, मॉड्यूलर यूनिट की असेंबली और पानी, सैनिटरी, प्लंबिंग तथा ड्रेनेज कनेक्शन का काम शामिल रहा।
कम लागत में तैयार हुई उपयोगी सुविधा
इस पहल से नए उपकरणों और सामग्री पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। उपलब्ध रेलवे संसाधनों, वर्कशॉप की तकनीकी क्षमता और अपने कर्मचारियों की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए कम लागत में यात्रियों के लिए उपयोगी सुविधा तैयार की गई।
ग्रामीण यात्रियों को मिलेगा लाभ
माताटीला, बसई, जखोरा और जीरोन NSG-6 श्रेणी के स्टेशन हैं, जहां आसपास के ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। ऐसे स्टेशनों पर स्वच्छ और सुविधाजनक शौचालय की सुविधा यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को स्टेशन परिसर में ही बेहतर स्वच्छता सुविधा उपलब्ध होने से सुविधा मिलेगी।
रीयूज़-रिफर्बिश-रीबिल्ड मॉडल को बढ़ावा
यह पहल ‘रीयूज़-रिफर्बिश-रीबिल्ड’ यानी पुन: उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्निर्माण की अवधारणा को दर्शाती है। इससे उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के साथ पर्यावरण अनुकूल और संसाधन बचाने वाले समाधान को बढ़ावा मिलता है।
मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट की यह पहल CMLR वर्कशॉप झांसी की तकनीकी क्षमता, नवाचार और यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप कम लागत में व्यावहारिक सुविधाएं विकसित करने की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करती है।


