भिलाई स्टील प्लांट की नौकरी तक पहुंची शिकायत, संभागायुक्त से जांच की मांग
बिलासपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटमी कला से अनुसूचित जनजाति (गोंड) के कथित फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम निवासी चंद्रकांत सलाम ने बिलासपुर संभाग के संभागायुक्त को आवेदन प्रस्तुत कर पांच व्यक्तियों के जाति प्रमाण-पत्रों की सक्षम स्तर पर जांच कराने तथा अनियमितता सिद्ध होने पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुष्पा राम, सूचित राम, प्रवीण राम, नलिन राम एवं सुरेश राम, सभी पिता साइमन सुखराम, निवासी ग्राम कोटमी कला, द्वारा कथित रूप से गलत जानकारी के आधार पर अनुसूचित जनजाति (गोंड) का जाति प्रमाण-पत्र प्राप्त किया गया है।
शिकायत में उल्लेख है कि वर्ष 1928 के राजस्व अभिलेखों तथा उपलब्ध दाखिल-खारिज रिकॉर्ड में संबंधित परिवार का धर्म/जाति ईसाई दर्ज होने की जानकारी प्राप्त हुई है। इसके बावजूद वर्तमान में गोंड का प्रमाण-पत्र जारी होने पर संदेह व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया है।
आवेदन के अनुसार संबंधित परिवार के प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया, उस समय प्रस्तुत दस्तावेज और मूल राजस्व अभिलेखों का सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षण कराया जाना आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि प्रवीण राम एवं नलिन राम, पिता साइमन सुखराम, कथित रूप से इसी प्रमाण-पत्र के आधार पर भिलाई स्टील प्लांट में कार्यरत हैं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि प्रमाण-पत्र गलत तथ्यों के आधार पर प्राप्त किए गए हैं, तो यह शासन को गुमराह कर आरक्षण का अनुचित लाभ लेने का गंभीर मामला होगा।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सभी प्रमाण-पत्रों की जांच सक्षम जाति सत्यापन समिति से कराई जाए और 1928 के राजस्व अभिलेखों का परीक्षण हो। यदि प्रमाण-पत्र गलत आधार पर जारी होना सिद्ध होता है तो उन्हें निरस्त कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।


