भारतीय रेलवे : कतार से क्लिक तक, चार दशक में बदली यात्री आरक्षण व्यवस्था

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बिलासपुर। भारतीय रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) ने बीते चार दशकों में लंबा सफर तय किया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई यह व्यवस्था आज दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक ऑनलाइन आरक्षण प्रणालियों में शामिल है। मैन्युअल टिकट बुकिंग से लेकर मोबाइल और ऑनलाइन आरक्षण तक रेलवे ने तकनीक के सहारे यात्रियों के सफर को तेज, सरल और अधिक पारदर्शी बनाया है।

1986 में हुई थी कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली की शुरुआत

भारतीय रेलवे ने वर्ष 1986 में यात्री आरक्षण प्रणाली (Passenger Reservation System-PRS) लागू की थी। इससे पहले टिकटों की बुकिंग पूरी तरह मैन्युअल रजिस्टरों के माध्यम से होती थी। समय के साथ पीआरएस पूरे देश में विस्तारित हुआ और यात्रियों को किसी भी आरक्षण केंद्र से देशभर की ट्रेनों के लिए टिकट बुक करने की सुविधा मिलने लगी।

ऑनलाइन बुकिंग ने बदला सफर का अनुभव

वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद रेलवे आरक्षण में बड़ा बदलाव आया। वर्तमान में अधिकांश यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए, जिनमें लगभग 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक हुए।

अगली पीढ़ी का पीआरएस होगा और अधिक सक्षम

भारतीय रेलवे अब क्लाउड आधारित नई पीआरएस प्रणाली लागू कर रहा है। इसके तहत प्रति मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग और 40 लाख से अधिक पूछताछ की क्षमता विकसित की जा रही है। नई प्रणाली बहुभाषी इंटरफेस, बेहतर स्पीड और अधिक विश्वसनीय सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

यात्री सुविधाओं में लगातार हो रहा विस्तार

रेलवे ने हाल के वर्षों में कई डिजिटल सुधार किए हैं। अग्रिम आरक्षण अवधि को 120 दिनों से घटाकर 60 दिन किया गया है। तत्काल टिकट बुकिंग में आधार सत्यापन और ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण लागू किया गया है ताकि पारदर्शिता बढ़े और बॉट व फर्जी बुकिंग पर रोक लगाई जा सके।

रेलवन और रेलकनेक्ट जैसे ऐप बने सहायक

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS) द्वारा विकसित रेलवन, रेलकनेक्ट, रेलमदद, एनटीईएस और यूटीएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की लाइव जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और अन्य सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध करा रहे हैं। रेलवन ऐप में एआई आधारित वेटिंग टिकट कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन जैसी सुविधा भी जोड़ी गई है।

आधुनिक तकनीक से होगा और बेहतर संचालन

भारतीय रेलवे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इनकी मदद से ट्रेन संचालन, रखरखाव, ऊर्जा प्रबंधन, टिकटिंग और यात्री सेवाओं को अधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाया जा रहा है।

भविष्य के लिए तैयार हो रहा रेलवे

भारतीय रेलवे का लक्ष्य भविष्य की बढ़ती यात्री आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तेज, सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली विकसित करना है। अगली पीढ़ी का पीआरएस इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यात्रियों को पहले से बेहतर और सहज यात्रा अनुभव मिलेगा।

रिपोर्ट: अभिषेक कुमार पाण्डेय, विशेष संवाददाता, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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