Samvidhanik Adhikar : अनुच्छेद 19(1)(क) नागरिकों को देता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार

Advertisement
Advertisement

लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है निर्भीक होकर विचार व्यक्त करने की आजादी : एच.पी. जोशी

रायगढ़। भारतीय संविधान में नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों में अनुच्छेद 19(1)(क) का विशेष महत्व है। यह अनुच्छेद प्रत्येक भारतीय नागरिक को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। इस अधिकार के माध्यम से नागरिक अपने विचार बोलकर, लिखकर, प्रकाशित कर तथा विभिन्न शांतिपूर्ण माध्यमों से व्यक्त कर सकते हैं।

पत्रकारिता और सरकार की समीक्षा को भी मिलता है संरक्षण

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल बोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पत्रकारिता, साहित्य, कला, सूचना के आदान-प्रदान और सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार भी शामिल है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यही अधिकार सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अनुच्छेद 19(2) के तहत लगाए जा सकते हैं उचित प्रतिबंध

हालांकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्णतः असीमित नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत देश की संप्रभुता एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था, मानहानि, न्यायालय की अवमानना और अपराध के लिए उकसावे जैसे आधारों पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

शांतिपूर्ण सम्मेलन भी लोकतंत्र का आधार

संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ख) नागरिकों को बिना हथियार के शांतिपूर्ण और निरायुध सम्मेलन करने का अधिकार देता है। यह अधिकार नागरिकों को सामूहिक रूप से अपनी बात रखने और जनमत निर्माण करने का अवसर प्रदान करता है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की पहचान

मानव अधिकार विशेषज्ञ और लेखक एच.पी. जोशी ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल चुनावों में नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्र सोच, असहमति को सम्मान देने और शासन की समीक्षा करने की क्षमता में निहित होती है। उन्होंने कहा कि जिस देश में नागरिक निर्भय होकर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, वही लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि संविधान का उद्देश्य केवल शासन व्यवस्था चलाना नहीं, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, समान अवसर और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के साथ जीवन जी सके।

“जब तक नागरिक निर्भय होकर सत्य बोल सकते हैं, तब तक लोकतंत्र जीवित रहता है; और जब सत्य बोलना अपराध बन जाए, तब लोकतंत्र का अस्तित्व संकट में पड़ जाता है।”

— एच.पी. जोशी
लेखक, विचारक, दार्शनिक एवं पुलिस अधिकारी

Advertisement
Share This Article