Raigarh News : 50 वर्षों से हर सोमवार गूंज रहा भक्ति का स्वर, दिव्य जीवन संघ का साप्ताहिक सत्संग बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र

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नयागंज स्थित दिव्य जीवन संघ शाखा में आधी सदी से निरंतर हो रहा सत्संग, गीता-रामचरितमानस के संदेशों से जुड़ रहे श्रद्धालु

रायगढ़। बदलते समय में जहां भागदौड़ भरी जिंदगी लोगों को आध्यात्मिक मूल्यों से दूर कर रही है, वहीं शहर के नयागंज स्थित निरंजन डाईंग हाउस परिसर में संचालित दिव्य जीवन संघ शाखा पिछले 50 वर्षों से नियमित साप्ताहिक सत्संग के माध्यम से श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का दीप जलाए हुए है। ऋषिकेश की प्रतिष्ठित संस्था दिव्य जीवन संघ (The Divine Life Society) से प्रेरित यह आयोजन प्रत्येक सोमवार बिना किसी व्यवधान के निरंतर आयोजित किया जा रहा है।

हर सोमवार भजन, गीता और रामचरितमानस का होता है सामूहिक पाठ

प्रत्येक सोमवार शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक आयोजित होने वाले सत्संग में भजन-कीर्तन, श्रीमद्भगवद्गीता एवं रामचरितमानस का सामूहिक पाठ, आध्यात्मिक प्रवचन और विचार-विमर्श होता है। वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होते हैं। कार्यक्रम का समापन गुरु वंदना, आरती और प्रसाद वितरण के साथ किया जाता है।

स्वर्गीय निलांबर मेहर ने रखी थी परंपरा की नींव

दिव्य जीवन संघ रायगढ़ शाखा के संयोजक एवं संगीत विशारद जगदीश मेहर ने बताया कि इस सत्संग की शुरुआत उनके पिता स्वर्गीय निलांबर मेहर ने कुछ श्रद्धालुओं के साथ मिलकर की थी। आज यह परंपरा 50 वर्षों बाद भी उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ जारी है।

संस्था के अध्यक्ष प्रो. क्रांतिकुमार तिवारी ने बताया कि प्रत्येक सप्ताह श्रीमद्भगवद्गीता और रामचरितमानस के श्लोकों एवं चौपाइयों का भावार्थ सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों की भी प्रेरणा मिलती है।

गीता और मानस के संदेशों पर हुआ आध्यात्मिक मंथन

20 जुलाई को आयोजित साप्ताहिक सत्संग की शुरुआत परम पूज्य स्वामी शिवानंद महाराज के पूजन-अर्चन से हुई। इसके बाद श्रीमद्भगवद्गीता के 18वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया गया।

इस अवसर पर प्रो. क्रांतिकुमार तिवारी ने अध्याय 18 के श्लोक 51 से 55 का भावार्थ प्रस्तुत करते हुए आत्मशुद्धि, वैराग्य, समर्पण और परमात्मा की प्राप्ति पर प्रकाश डाला। वहीं पं. रघुनंदन तिवारी ने रामचरितमानस के बालकाण्ड के दोहा 84 एवं 85 की व्याख्या करते हुए भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और धर्म के संदेशों को सरल एवं प्रेरक शैली में समझाया।

‘शक्ति ही जीवन है’ : लक्ष्मी मेहर

विदुषी श्रीमती लक्ष्मी मेहर ने “शक्ति का रहस्य” विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “बिना शक्ति के भक्ति संभव नहीं, शक्ति ही जीवन है।” उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक साधना तभी सार्थक होती है, जब मनुष्य अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर जीवन को सकारात्मक दिशा दे।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल

सत्संग में भीमसेन मिरानिया, खुशीराम मेहर, आईपी यादव, केएल मेहर, श्रीमती पार्वती नामदेव, राघवेन्द्र सिंह, हरेराम तिवारी, वेदप्रकाश शुक्ला, मधुसूदन सोनी, रामायण सिंह, देवेंद्र मेहर, कांति देवांगन, छाया देवांगन, अदिति वशिष्ठ सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक जागरण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता पर अपने विचार साझा किए।

नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ रही अनूठी परंपरा

दिव्य जीवन संघ का यह साप्ताहिक सत्संग आज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बन चुका है। लगातार पाँच दशकों से चल रही यह परंपरा नई पीढ़ी को भारतीय आध्यात्मिक विरासत, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का प्रेरक कार्य कर रही है।

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