‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ पर लगा था प्रतिबंध, लेकिन रेडियो की एक चूक से ‘अजीब दास्तां है ये’ हो गया बैन
मुंबई। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं, जो अपनी लोकप्रियता के साथ-साथ विवादों के कारण भी याद किए जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा वर्ष 1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ से जुड़ा है। इस फिल्म का एक गीत बैन किए जाने की तैयारी में था, लेकिन रेडियो विभाग की एक बड़ी गलती के कारण दूसरा गाना प्रतिबंधित हो गया और जिस गीत पर रोक लगनी थी, वही पूरे देश में बजता रहा।
‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ पर उठी थी आपत्ति
निर्देशक किशोर साहू की फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई में राज कुमार और मीना कुमारी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म के अधिकांश गीत लता मंगेशकर ने गाए थे। इनमें से मीना कुमारी पर फिल्माया गया गीत ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ उस समय विवादों में आ गया। बताया जाता है कि रेडियो सेंसर बोर्ड को इसके कुछ बोल आपत्तिजनक लगे, जिसके बाद इसे रेडियो प्रसारण से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया।
एक गलती से ‘अजीब दास्तां है ये’ पर लग गया बैन
उस दौर में जिन गीतों पर प्रतिबंध लगाया जाता था, उनके रिकॉर्ड पर ‘अस्वीकृत’ का लेबल लगाया जाता था। लेकिन रिकॉर्ड संभालने वाले एक क्लर्क ने गलती से यह लेबल फिल्म के ही मशहूर गीत ‘अजीब दास्तां है ये’ पर लगा दिया। परिणाम यह हुआ कि रेडियो पर ‘अजीब दास्तां है ये’ का प्रसारण रुक गया, जबकि ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ लगातार बजता रहा।
बैन के बावजूद गीत बन गया सुपरहिट
रेडियो की इस प्रशासनिक चूक के कारण जिस गीत पर रोक लगनी थी, वही देशभर में लोकप्रिय हो गया। बाद में अधिकारियों को गलती का पता चला और रिकॉर्ड ठीक किए गए, लेकिन तब तक ‘शीशा-ए-दिल इतना ना उछालो’ लोगों की जुबान पर चढ़ चुका था और सुपरहिट बन गया।
शंकर-जयकिशन का संगीत, हसरत जयपुरी के बोल
फिल्म के गीतों का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था, जबकि इनके बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे। दोनों चर्चित गीतों को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज़ दी, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।


