वन विभाग : एक अधिकारी को तीन-तीन प्रभार, पसान वनपरिक्षेत्र में पदस्थापना पर उठे सवाल

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कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र में विभागीय व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल, जांच की मांग

कटघोरा/पसान। कटघोरा वनमंडल के वनपरिक्षेत्र पसान में एक अधिकारी को एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने और लंबे समय से एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

एक अधिकारी के पास तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ईश्वरदास मानिकपुरी वर्तमान में पसान सर्किल के डिप्टी रेंजर होने के साथ-साथ पसान एवं अड़सरा बीट तथा पसान नर्सरी रोपड़ी का भी प्रभार संभाल रहे हैं। एक ही अधिकारी को तीन अलग-अलग जिम्मेदारियां दिए जाने को लेकर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

लंबे समय से एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहने का दावा

सूत्रों का यह भी दावा है कि ईश्वरदास मानिकपुरी कई वर्षों से लगातार पसान क्षेत्र में ही पदस्थ हैं। पहले बीट गार्ड के रूप में और बाद में पदोन्नति के बाद डिप्टी रेंजर बनने के बावजूद उनकी तैनाती इसी क्षेत्र में बनी हुई है। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे प्रश्न

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वन विभाग में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर स्थानांतरण की व्यवस्था होती है। ऐसे में एक ही अधिकारी को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बनाए रखना और अतिरिक्त प्रभार सौंपना विभागीय पारदर्शिता एवं जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर निम्न बिंदुओं को स्पष्ट करने की मांग की है—

  • ईश्वरदास मानिकपुरी कितने वर्षों से पसान क्षेत्र में पदस्थ हैं?
  • पदोन्नति के बाद भी उन्हें उसी क्षेत्र में रखने का आधार क्या है?
  • वर्तमान में उनके पास कौन-कौन से अतिरिक्त प्रभार हैं और वे किस आदेश के तहत दिए गए हैं?
  • क्या यह व्यवस्था विभागीय नियमों एवं स्थानांतरण नीति के अनुरूप है?

विभाग के पक्ष का इंतजार

फिलहाल इस मामले में वन विभाग या संबंधित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

नोट: यह समाचार स्थानीय सूत्रों एवं उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।

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