NEET-UG 2026 से पहले टेलीग्राम पर प्रतिबंध को लेकर विवाद, कंपनी पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट

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NEET-UG 2026 की री-एग्जाम प्रक्रिया से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर लगाए गए 24 घंटे के अस्थायी प्रतिबंध को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। अदालत ने मामले में तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है।

परीक्षा सुरक्षा को लेकर लगाया गया था प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी National Testing Agency की सिफारिश पर यह प्रतिबंध लगाया था। सरकार का कहना है कि यह कदम पेपर लीक और गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने तथा नकल रैकेट पर नियंत्रण के लिए आवश्यक था।

इसके साथ ही टेलीग्राम को 30 जून तक अपने मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद करने का निर्देश भी दिया गया था।

NTA का आरोप: पेपर लीक में फीचर का दुरुपयोग

एनटीए ने दावा किया है कि टेलीग्राम के एडिटिंग फीचर का उपयोग परीक्षा के बाद संदेश बदलकर “पेपर लीक” के सबूत तैयार करने में किया गया। एजेंसी के अनुसार, प्रश्न पत्रों और टाइमस्टैम्प के साथ छेड़छाड़ कर संगठित नकल गिरोह सक्रिय रहे हैं।

इस कारण परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया।

ऐप स्टोर्स से भी हटाया गया टेलीग्राम

इस कार्रवाई के बाद Google और Apple ने भी अपने-अपने मोबाइल ऐप स्टोर से टेलीग्राम को अस्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

टेलीग्राम CEO की कड़ी प्रतिक्रिया

Pavel Durov ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि करोड़ों सामान्य भारतीय यूजर्स प्रभावित होते हैं। उनका कहना है कि लगभग 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं पर इसका असर पड़ा है।

बहस तेज: सुरक्षा बनाम डिजिटल स्वतंत्रता

छात्र संगठनों और अभिभावकों का एक वर्ग इस कदम को परीक्षा सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है, जबकि दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि VPN जैसी तकनीकों के कारण इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।

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