गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी में चौरसिया परिवार द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा का पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। कथा व्यास आचार्य डॉ. राजेंद्रकृष्ण पांडे ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायक प्रवचन में भगवान शिव के आदर्श गृहस्थ जीवन का वर्णन करते हुए कहा कि संसार में भगवान शिव से बड़ा गृहस्थ कोई नहीं है। शिव केवल संहार के देवता या योगियों के आराध्य ही नहीं हैं, बल्कि वे गृहस्थ जीवन के भी सर्वोच्च आदर्श हैं। प्रत्येक परिवार, प्रत्येक पति-पत्नी और प्रत्येक गृहस्थ को शिव परिवार से जीवन जीने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
अपने प्रवचन में आचार्य पांडे ने कहा कि आज समाज में परिवार टूट रहे हैं, रिश्तों में दूरियां बढ़ रही हैं, सहनशीलता कम होती जा रही है और अहंकार बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में यदि किसी आदर्श परिवार को देखना हो तो भगवान शिव के परिवार को देखना चाहिए। शिव परिवार हमें प्रेम, त्याग, धैर्य, समर्पण, समानता, सम्मान और एकता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। उनके पास न सोने के महल हैं, न वैभव का प्रदर्शन है, फिर भी वे देवों के देव महादेव हैं। यह संदेश देता है कि परिवार की खुशहाली धन और ऐश्वर्य से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और संस्कारों से होती है।
आचार्य पांडे ने कहा कि शिव परिवार विविधताओं में एकता का सबसे बड़ा उदाहरण है। भगवान शिव का वाहन नंदी बैल है, माता पार्वती का वाहन सिंह है, भगवान गणेश का वाहन मूषक है और भगवान कार्तिकेय का वाहन मयूर है। स्वाभाविक रूप से ये सभी एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं, लेकिन शिव परिवार में सभी प्रेम और सौहार्द के साथ रहते हैं। इससे हमें शिक्षा मिलती है कि परिवार में विचार अलग हो सकते हैं, स्वभाव अलग हो सकते हैं, लेकिन मन अलग नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने कभी परिवार और समाज की जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला और समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई, तब भगवान शिव ने स्वयं विषपान कर संसार की रक्षा की। यह घटना हमें सिखाती है कि एक सच्चा गृहस्थ वही है जो अपने परिवार और समाज की रक्षा के लिए स्वयं कष्ट सहन करने को तैयार रहे।
कथा के दौरान उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव के दांपत्य जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। अर्धनारीश्वर का स्वरूप हमें यह संदेश देता है कि स्त्री और पुरुष समान रूप से सम्मान और अधिकार के अधिकारी हैं। जहां पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्वतः आती है।
आचार्य पांडे ने कहा कि भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के प्रति शिव और पार्वती का स्नेह भी आदर्श माता-पिता का उदाहरण प्रस्तुत करता है। शिव परिवार हमें संस्कारयुक्त संतानों के निर्माण की प्रेरणा देता है। आज की पीढ़ी को यदि अच्छे संस्कार देने हैं तो परिवार में धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों का वातावरण बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि आज लोग बड़ी-बड़ी सफलताएं प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन अपने परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं। भगवान शिव का जीवन सिखाता है कि परिवार को साथ लेकर चलना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। जहां परिवार में प्रेम होता है, वहां भगवान का वास होता है।
कथा में उपस्थित हजारों श्रद्धालु शिव परिवार के इन प्रेरणादायक प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हो उठे। पूरा कथा पंडाल हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।
उल्लेखनीय है कि ग्राम खोडरी में आयोजित यह श्री शिवमहापुराण कथा क्षेत्र का एक भव्य धार्मिक आयोजन बन चुका है। चौरसिया परिवार द्वारा अत्यंत श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव से इस आयोजन का संचालन किया जा रहा है। कथा स्थल पर प्रतिदिन दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और शिवमहापुराण का रसपान कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा के उपरांत चौरसिया परिवार के द्वारा प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल, प्रसाद एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है, जिसकी सभी उपस्थितजन सराहना कर रहे हैं।
धार्मिक वातावरण, शिवभक्ति की अविरल धारा और श्रद्धालुओं की अपार उपस्थिति से पूरा खोडरी गांव शिवमय हो उठा है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
“यदि संसार का प्रत्येक परिवार भगवान शिव के परिवार से प्रेम, त्याग, सम्मान और एकता की सीख ले ले, तो समाज की आधी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।”




