जोगीडीपा से विस्थापित परिवार को मिला पक्का आवास, बोले- अब जिंदगी होगी आसान
रायगढ़। सूर्या विहार में सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्का मकान मिलने के बाद जोगीडीपा से विस्थापित आंखों से दिव्यांग सोनू सारथी और उनके परिवार के चेहरे पर नई उम्मीद और खुशी साफ दिखाई दे रही है। वर्षों तक कच्चे मकान में जीवन बिताने वाले इस परिवार के लिए नया आवास केवल एक घर नहीं, बल्कि संघर्षों के बाद मिली सम्मानजनक नई शुरुआत बन गया है।
नए घर में प्रवेश करते ही सोनू सारथी ने दीवारों, कमरों, गैलरी, रसोई और वॉशरूम को हाथों से छूकर महसूस किया। घर के हर हिस्से को समझते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा सुविधायुक्त घर मिलेगा, जहां बिजली, पानी, किचन और अलग वॉशरूम जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।
तीन परिवारों को मिले अलग-अलग आवास
सोनू सारथी पहले जोगीडीपा में अपनी मां, दो भाइयों और बहन के साथ तीन कमरों के कच्चे खपरा मकान में रहते थे। एक ही घर में तीन परिवारों के रहने के कारण प्रशासन द्वारा परिवार की आवश्यकता को देखते हुए तीन अलग-अलग आवासों का आवंटन किया गया है।
संघर्षों के बीच मां ने संभाला परिवार
सोनू की मां ईश्वरी सारथी ने बताया कि वर्ष 2020 में हार्ट अटैक से उनके पति का निधन हो गया था। इसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। जोगीडीपा में चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाकर उन्होंने बच्चों का पालन-पोषण किया।
उन्होंने कहा कि पुरानी जगह और दुकान छूटने का दुख जरूर है, लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षित और पक्का घर मिलने की खुशी उससे कहीं अधिक बड़ी है। अब उन्हें अपने बच्चों के भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा भरोसा महसूस हो रहा है।
दो बेटे संभाल रहे परिवार की जिम्मेदारी
परिवार के दो बेटे वर्तमान में ऑटो चलाकर घर की आर्थिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। नए आवास मिलने से परिवार को अब सुरक्षित वातावरण, बेहतर सुविधाएं और व्यवस्थित जीवन की नई उम्मीद मिली है।
विशेष आवश्यकता वाले परिवारों को दी गई प्राथमिकता
आयुक्त Brijesh Singh Kshatriya ने कहा कि जोगीडीपा पुनर्वास योजना के तहत विशेष आवश्यकता वाले परिवारों को प्राथमिकता और संवेदनशीलता के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उन्होंने कहा कि सोनू सारथी और उनके परिवार का संघर्ष प्रेरणादायक है। प्रशासन का उद्देश्य केवल आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को सम्मानजनक और सुविधायुक्त जीवन देना भी है। यह देखकर संतोष होता है कि परिवार अब सुरक्षित और बेहतर वातावरण में जीवन की नई शुरुआत कर रहा है।
संघर्षों के बाद मिली नई शुरुआत
नए घर के कमरों को हाथों से महसूस करते हुए सोनू बार-बार यही कहते नजर आए कि अब उन्हें सचमुच अपना घर होने का एहसास हो रहा है। वर्षों तक अभावों में जीवन बिताने वाले इस परिवार के लिए सूर्या विहार का यह नया आशियाना उम्मीद, सम्मान और नए भविष्य का प्रतीक बन गया है।
