“गरियाबंद का सुखरीडबरी गांव विकास से अब भी कोसों दूर: 50 साल बाद भी सड़क, पानी और इलाज का संकट बरकरार”

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जंगलों के बीच बसा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्षरत, विकास के दावों पर खड़े हुए सवाल

गरियाबंद जिले के घने जंगलों में स्थित विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति का गांव सुखरीडबरी आज भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह अछूता दिखाई देता है। करीब 50–60 साल पुरानी बसाहट और लगभग 30 परिवारों की आबादी वाला यह गांव आज भी सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।


राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ अधूरा, ग्रामीणों में नाराजगी

ग्रामीणों के अनुसार सुखरीडबरी को अब तक राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिला है, जिसके कारण कई सरकारी योजनाओं का लाभ यहां पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। पेंशन, राशन कार्ड, आधार और अन्य जरूरी दस्तावेजों से लेकर कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों तक सीमित रूप में ही पहुंच रहा है।


कच्चा रास्ता बना बड़ी परेशानी, बारिश में गांव का संपर्क दुनिया से कट जाता है

गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। बरसात के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे गांव का संपर्क बाहरी इलाकों से लगभग टूट जाता है। ग्रामीणों को राशन, इलाज और जरूरी कार्यों के लिए कई किलोमीटर की कठिन यात्रा करनी पड़ती है।


बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता परिवार, मानसिक रूप से बीमार युवक की देखभाल बनी चुनौती

गांव की अग्नि बाई भुंजिया अपने मानसिक रूप से बीमार बेटे महेश भुंजिया की देखभाल को लेकर संघर्ष कर रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि परिवार को उसकी निगरानी लगातार करनी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार आधार और राशन कार्ड न बनने के कारण वह सरकारी सुविधाओं से भी वंचित है।


शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल, भवन के बिना चल रही पढ़ाई, आगे की शिक्षा के लिए बच्चों को बाहर जाना मजबूरी

गांव में प्राथमिक स्कूल तो संचालित है, लेकिन भवन की कमी के कारण पिछले कई वर्षों से अतिरिक्त स्थान में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। पांचवीं के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है, जो बरसात में और भी कठिन हो जाता है।


पानी, स्वास्थ्य और सामुदायिक भवन की कमी से ग्रामीण परेशान, 3 से 10 किमी तक की दूरी तय करनी पड़ती है

ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। राशन लेने के लिए लगभग 3 किलोमीटर और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में यह दूरी कई बार गंभीर खतरा बन जाती है।


अधूरी योजनाओं और भ्रष्टाचार के आरोप, विकास कार्यों पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि लगभग दस वर्ष पहले गोद ग्राम योजना के तहत विकास कार्य शुरू हुए थे, लेकिन कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के चलते वास्तविक लाभ गांव तक नहीं पहुंच सका।


“विकास कागजों में या जमीनी हकीकत में?”—सबसे बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाई जा रही हैं, तो सुखरीडबरी जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित हैं। क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमी?

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