सुंदरगढ़ जिले के बागबुड गांव के मनोहर प्रधान ने संघर्षों को पीछे छोड़कर ओडिशा सिविल सेवा परीक्षा में 131वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की है। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों में बचपन से शुरू हुआ संघर्षपूर्ण जीवन सफर
मनोहर प्रधान का जन्म एक बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ। उनके पिता मंगल प्रधान हाट-बाजारों में गुब्बारे बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, जबकि माता सीमित संसाधनों में घर संभालती थीं। बचपन में मनोहर भी पिता के साथ काम में सहयोग करते थे, लेकिन उन्होंने शिक्षा को कभी नहीं छोड़ा।

शिक्षा के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन हालात में आगे बढ़ता शैक्षणिक सफर
बारहवीं विज्ञान की पढ़ाई पूरी करने के बाद आर्थिक तंगी के कारण उन्हें निजी क्षेत्र में काम करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने डिप्लोमा इन टीचर एजुकेशन पूरा किया और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहे। कठिन परिस्थितियों में भी उनका फोकस हमेशा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर बना रहा।

देश सेवा से प्रशासनिक सेवा तक का निरंतर विकसित होता करियर सफर
वर्ष 2013 में मनोहर प्रधान का चयन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में हुआ, जिसके बाद उन्होंने देश सेवा की शुरुआत की। इसके बाद उनका चयन ओडिशा पुलिस संचार विभाग में सब-इंस्पेक्टर के रूप में हुआ। वर्तमान में वे राउरकेला जिला पुलिस कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं और साथ ही सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी।
तीसरे प्रयास में ओडिशा सिविल सेवा परीक्षा में 131वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता
लगातार नौकरी और जिम्मेदारियों के बीच तैयारी जारी रखते हुए मनोहर प्रधान ने तीसरे प्रयास में ओडिशा सिविल सेवा परीक्षा में 131वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि ने उनके परिवार, गांव और पूरे सुंदरगढ़ जिले का नाम रोशन कर दिया है।
संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक यात्रा बनी हजारों युवाओं के लिए मिसाल
मनोहर प्रधान की यह कहानी साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत निरंतर जारी रहे। उनका सफर आज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।


