पसान के स्कूल भवन निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, हादसे की आशंका

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सरपंच-पंचों ने जनदर्शन में सौंपा आवेदन, जांच और काम रोकने की मांग

कोरबा जिले के ग्राम पसान में निर्माणाधीन शासकीय बालक हाई स्कूल भवन की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। सोमवार को जनदर्शन में कलेक्टर को दिए गए आवेदन में सरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने भवन निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत में ये 9 गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने आवेदन में बताया कि निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों की जमकर अनदेखी हुई है। कॉलम-बीम में कंक्रीट सही ढंग से नहीं भरा गया है, जिससे हनीकॉम्ब बन गए हैं और जगह-जगह गिट्टी बाहर दिख रही है। ढलाई के समय वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया गया। कई स्थानों पर कॉलम-बीम टूटे हुए और दरारयुक्त हैं।

 

आरोप है कि निर्माण में हुई कमियों को छुपाने के लिए बाद में सीमेंट प्लास्टर और लीपापोती की गई। दीवार और कॉलम के जोड़ तकनीकी रूप से कमजोर और असमान हैं। गिट्टी, सीमेंट और सरिया की गुणवत्ता भी संदिग्ध बताई गई है। बीम और छत के किनारों पर फिनिशिंग नहीं होने से मजबूती नहीं है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है।

बच्चों की जान को खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन स्कूली बच्चों के लिए बनाया जा रहा है। घटिया निर्माण से भविष्य में बड़ी दुर्घटना और जनहानि की आशंका है। सरकारी राशि का दुरुपयोग कर जल्दबाजी में काम निपटाया जा रहा है।

सरपंच-पंचों ने जताई आपत्ति
शिकायत पत्र पर सरपंच, निर्माण तथा विकास समिति के सदस्यों और वार्ड क्रमांक 6, 19, 20 के पंचों के हस्ताक्षर हैं। सबूत के तौर पर निर्माण स्थल की फोटोग्राफ भी आवेदन के साथ संलग्न की गई है।

प्रशासन से 4 मांग
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि 1. तकनीकी टीम से तत्काल जांच कराई जाए, 2. निर्माण सामग्री की लैब में गुणवत्ता जांच हो, 3. दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो, 4. जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।

जनदर्शन में शिकायत दर्ज हो चुकी है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग और शिक्षा विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला।

क्या कहते हैं ग्रामीण
स्कूल का भवन बच्चों के लिए बन रहा है। अगर अभी नहीं रुका तो कल को कोई बड़ा हादसा होगा। हम सिर्फ बच्चों की सुरक्षा चाहते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक ग्रामीण

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