खनिज माफियाओं के लाडले या प्रशासन के चहेते? दो वर्षों से दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे आरआई दीपक पर उठे सवाल

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जिला भर में ताबड़तोड़ अवैध खनन, जिला चला रहे हैं एक आर आई , खनिज अधिकारी बजरंग पैकरा अपने महल से बाहर नहीं निकलते

सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला में एक ही अधिकारी के पास दो महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी, निष्पक्षता और प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल। जिले में पदस्थ एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी पिछले दो वर्षों से अधिक समय से दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा विशेष कारण है जिसके चलते एक ही अधिकारी को लंबे समय तक दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगर कारण गंभीर है तो क्या जिला में एक ही व्यक्ति को इतना बड़ा पद देना सही है और जब प्रभारी के तौर पर कार्य कर रहे हैं तो क्या जिले में अवैध खनन परिवहन कम हुई हैं लगातार जिला में गौण खनिज ग्रामों से भर भर के अवैध खनन परिवहन किया जा रहा है। या यू कहे कि खनिज माफिया के चहेते बने है। जिला में लगातार शिकायतें और समाचार के माध्यम से सूचना मिल रहा, क्षेत्र में चर्चा है कि खनिज गतिविधियों और राजस्व मामलों में उक्त अधिकारी का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि उनके आदेश को ही अंतिम माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई अधिकारी आए और गए, लेकिन इस आरआई की पकड़ लगातार मजबूत बनी हुई है।

विपक्षी स्वर यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासनिक नियमों के तहत लंबे समय तक दो पदों पर बने रहना उचित है? यदि जिले में अन्य योग्य अधिकारी उपलब्ध हैं तो जिम्मेदारियों का विकेंद्रीकरण क्यों नहीं किया जा रहा?

हालांकि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। यदि विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
सवाल जो उठ रहे हैं। दो वर्षों से अधिक समय तक दो पदों पर पदस्थ रहने की वजह क्या है?
क्या यह व्यवस्था प्रशासनिक आवश्यकता है या किसी विशेष संरक्षण का परिणाम?
क्या जिले के अन्य अधिकारियों को अवसर नहीं मिलना चाहिए?
लंबे समय से एक ही स्थान पर जिम्मेदारी निभाने से पारदर्शिता प्रभावित तो नहीं हो रही?

जिला कलेक्टर से मांग, जरूरी है बदलाव

खनिज विभाग के हर कार्रवाई पर आर आई का फोटो, केवल परिवहन वाहनों पर कार्रवाई, खनन कर्ता क्रेशर माफियाओं पर खुला छूट

मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि दोहरी जिम्मेदारी देने के पीछे प्रशासनिक मजबूरी है या कोई अन्य कारण। क्यों कि लगातार अस्थाई पद पर रहने से खनिज मामलों से मिलीभगत का संकेत प्राप्त हो रहा है तथा अगर खनिज माफिया से मिले हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है क्योंकि इनका माफियाओं से संपर्क में रहना राजस्व को लाखों करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा सकता है। वही सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आर आई दीपक पटेल इस दिनों केवल केवल परिवहन वाहनों पर ही कार्रवाई को सीमित रखे है, इनके दो साल से ऊपर के कार्यकाल में कभी खदान सील नहीं किया गया। वही खानापूर्ति कर शासकीय फाइनल नाटकीय प्रदर्शन करते आ रहे हैं। फिलहाल नए कलेक्टर से उम्मीद है कि खनिज माफिया से मिले हुए अधिकारी के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही करें ताकि लोगों को भरोसा और राजस्व के संपत्ति को हानि न पहुंचा सके।

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