कोरिया में सीएम विष्णुदेव साय का सख्त एक्शन: शिकायतों पर सहायक आयुक्त निलंबित, शिक्षा और पीएम आवास योजना में लापरवाही पर अधिकारियों को कड़े निर्देश

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कोरिया जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के दौरान मिली शिकायतों पर सहायक आयुक्त को सस्पेंड कर दिया। पीएम आवास योजना और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए।

CM Sai Action: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के दौरान मिली लगातार शिकायतों पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री ने सहायक आयुक्त आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई। मुख्यमंत्री ने जन चौपाल में लोगों की समस्याएं सुनते हुए साफ कहा कि शासन की योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शिकायतों के बाद CM साय का सख्त रुख

कोरिया जिले में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने कई प्रशासनिक शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। इनमें योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, अधिकारियों की उदासीनता और जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही जैसे मुद्दे शामिल थे।

शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मौके पर ही सहायक आयुक्त आयुष प्रताप सिंह को सस्पेंड करने का फैसला लिया। CM साय का बड़ा एक्शन अब पूरे प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से साफ कहा कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम बताया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी रफ्तार पर नाराजगी

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। कई इलाकों में निर्माण कार्य अधूरा मिलने और पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने अधिकारियों से जवाब मांगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि योजना के लंबित कार्यों को तेजी से पूरा किया जाए ताकि जरूरतमंद परिवारों को जल्द आवास मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजना को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं।

कई लोगों ने बताया कि आवेदन स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। CM साय का बड़ा एक्शन इस वजह से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा परिणाम पर मांगी रिपोर्ट

कोरिया जिले में खराब परीक्षा परिणाम को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विस्तृत कार्ययोजना मांगी और स्कूलों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई और सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सरकार की प्राथमिकता है।

यदि परिणाम लगातार खराब आते हैं तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। CM साय का बड़ा एक्शन शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सख्त संदेश माना जा रहा है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ती है तो सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार हो सकता है।

जन चौपाल में सुनी समस्याएं, त्वरित समाधान के निर्देश

सुशासन तिहार के दौरान आयोजित जन चौपाल में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने एक-एक आवेदन की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। सड़क, पानी, बिजली, राशन और राजस्व मामलों से जुड़ी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। CM साय का बड़ा एक्शन अब प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार जनता के बीच सक्रिय प्रशासन की छवि मजबूत करना चाहती है। वहीं स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद योजनाओं और सेवाओं में सुधार देखने को मिलेगा।

सुशासन तिहार के जरिए सरकार का प्रशासनिक संदेश

छत्तीसगढ़ सरकार इन दिनों सुशासन तिहार के जरिए जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। मुख्यमंत्री खुद अलग-अलग जिलों में पहुंचकर जनता से संवाद कर रहे हैं। कोरिया जिले में हुई कार्रवाई को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

CM साय का बड़ा एक्शन यह संकेत देता है कि सरकार शिकायतों को सीधे गंभीरता से ले रही है और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह जमीनी स्तर पर निगरानी जारी रहती है तो योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार संभव है।

जनता भी चाहती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक स्तर पर इन निर्देशों का कितना असर दिखाई देता है।

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