पसान में प्रशासन का अल्टीमेटम बेअसर: डेडलाइन के 3 दिन बाद भी सरकारी आवास पर कब्जा कायम

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तहसीलदार के आदेश के बाद भी नहीं हुई बेदखली, “कब्जा मुक्त अभियान” पर उठे सवाल

तहसील प्रशासन की सख्ती के दावों के बीच पसान में एक शासकीय आवास से अवैध कब्जा हटाने का आदेश फिलहाल कागजों तक सिमट कर रह गया है। तहसीलदार पसान द्वारा 18 मई 2026 तक कब्जा हटाने का दिया गया अल्टीमेटम बीत चुका है, लेकिन ग्राम सेवक के लिए आरक्षित आवास पर अब भी ताला नहीं खुला है।

न्यायालय तहसीलदार पसान ने 08.05.2026 को सूचना क्रमांक 35/तह./वाचक/2026 जारी की थी। इसके तहत ग्राम पसान, प.ह.न. 03, खसरा नंबर 180/2, रकबा 0.024 हेक्टेयर पर बने शासकीय आवास पर काबिज साजिद खान पिता मो. अजीम खान को 18 मई तक कब्जा मुक्त करने को कहा गया था।

राजस्व प्रकरण क्रमांक 20262051200009/बी-121/2026 में स्पष्ट चेतावनी थी कि तय समय में आवास खाली न करने पर “बलपूर्वक बेदखली” की जाएगी। म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई होनी थी।

आज 21 मई को डेडलाइन खत्म हुए 72 घंटे बीत चुके हैं। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार शासकीय आवास पर अभी भी साजिद खान का कब्जा है। नियमानुसार 18 मई के बाद तहसीलदार को पटवारी, राजस्व निरीक्षक और पुलिस बल के साथ बेदखली करानी थी। लेकिन जमीन पर ऐसी कोई कार्रवाई नजर नहीं आई।

प्रशासन मौन, सवाल कई
इस मामले में तहसील कार्यालय पसान से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका।

गौरतलब है कि पूरा जिला अभी “शासकीय भूमि कब्जा मुक्त अभियान” के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में तहसील मुख्यालय में ही आदेश का पालन न होने से प्रशासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अफसरों के नाक के नीचे ही कब्जा नहीं हट पा रहा, तो दूरदराज के गांवों का क्या होगा?

कानून के जानकारों के मुताबिक डेडलाइन खत्म होने के बाद तहसीलदार को बिना देरी बेदखली करानी चाहिए। अगर कब्जाधारी ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश ले लिया हो, तो ही कार्रवाई रुक सकती है। फिलहाल ऐसे किसी स्टे की जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

अब सबकी नजर तहसील प्रशासन पर है। क्या अगले 24 घंटे में बुलडोजर चलेगा या फाइल फिर से धूल फांकती रहेगी? शासकीय आवास खाली होने के बाद ही ग्राम सेवक को रहने की जगह मिल पाएगी।

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