बैठक के बाद उन्होंने कहा कि, जगपाल सिंह के द्वारा मालिक मकबूजा के नाम पर उनसे जमीन लिया गया था, यह बात 1963 की है। जिसके बाद जमीन पर लगे सागौन के पेड़ों को उन्होंने बेचा, और अपना काम हो जाने के बाद जमीन वापस करने की बात कही थी। लेकिन उसके बाद जब भी ग्रामीणों ने अपनी जमीन की बात कही तो ग्रामीणों को हमेशा कहा कि जमीन आपकी ही है। हमारा काम होने के बाद हम वापस कर देंगे।
जगपाल सिंह के निधन के बाद बेटों ने बेचीं जमीन
उन्होंने आगे कहा कि, यह सब होते कई वर्ष बीत गए अब समस्या ग्रामीणों की यह बढ़ गयी है कि जिन्होंने उनसे जमीन अपने काम के लिए लिया था, उस जगपाल सिंह का निधन हो गया है। उनके बेटों के द्वारा वो जमीन रायपुर के किसी अदरस कम्पनी को बेचा जा चुका है। जिसको लेकर ग्रामीणों में बड़ी चिंता बनी हुई है कि अब उनकी जमीन जो कि बहुत पहले किसी काम के लिए दी गयी थी, अब उनकी भी नही रही।
ग्रामीणों ने आगे की लड़ाई लड़ने की बात
वहीं ग्रामीणों ने बताया कि, जब क्षेत्र में नक्सल समस्या थी तब तक कोई जमीन के लिए कभी नही आया। लेकिन अब जब नक्सल समस्या खत्म हो गयी है, तो ग्रामीण इलाके में इस प्रकार की समस्या निकल कर आ रही है। अब गाँव वालों ने बैठक कर अपनी समस्या को लेकर आगे तक लड़ाई जारी रखने की बात कही।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने आगे कहा कि, पिछले 10 साल से वो अपनी इस समस्या के लिए लड़ाई लड़ रहे है। लेकिन उनके पक्ष में कुछ नहीं हो रहा है। बल्कि समस्या बढ़ती जा रही है। हम अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे। हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हम चक्काजाम और रैली जैसा आयोजन भी करेंगे।


