लखनऊ/नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्योगों के बंद होने के लिए ट्रेड यूनियनों और मजदूर वर्ग को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान की कड़ी आलोचना की है। पार्टी ने इसे मजदूर वर्ग, ट्रेड यूनियनों और श्रमिक हितों के खिलाफ बताया है।
मुख्यमंत्री के बयान पर भाकपा ने जताई आपत्ति
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. गिरीश ने जारी प्रेस बयान में कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान न केवल ट्रेड यूनियनों और मजदूर वर्ग का अपमान है, बल्कि उन श्रमिकों के अधिकारों को भी नजरअंदाज करता है जिनकी सुरक्षा और हितों के लिए ट्रेड यूनियन लंबे समय से संघर्ष करती रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा लंबे समय से मजदूर संगठनों के खिलाफ रही है और मजदूरों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जाता रहा है।
उद्योग बंद होने के लिए नीतियों को ठहराया जिम्मेदार
भाकपा ने कहा कि उद्योगों के बंद होने का कारण ट्रेड यूनियन नहीं बल्कि सरकार और उद्योगपतियों की नीतियां हैं। बयान में कहा गया कि उद्योगपति अधिक मुनाफा कमाने, बैंकों से कर्ज लेने, कर चोरी और अन्य आर्थिक गतिविधियों के जरिए उद्योगों को कमजोर करते हैं, जिसके बाद उन्हें बंद कर जमीनों के व्यावसायिक उपयोग से लाभ कमाया जाता है।
पार्टी ने कहा कि वर्ष 1991 में नई आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद उद्योग बंद होने की प्रक्रिया और तेज हुई, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिक प्रभावित हुए।
कानपुर की मिलों का भी किया उल्लेख
भाकपा ने ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उदाहरण दिए गए कानपुर की मिलों की वास्तविकता अलग रही है। पार्टी के अनुसार, रिलायंस टेक्सटाइल को बाजार उपलब्ध कराने के लिए कानपुर की कई मिलों को बंद किया गया और बाद में उनकी जमीनों का अन्य उपयोग किया गया।
ट्रेड यूनियन को बताया संवैधानिक अधिकार
भाकपा ने कहा कि भारत में ट्रेड यूनियन बनाना संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार है। पार्टी का कहना है कि ट्रेड यूनियनों की स्थापना औद्योगिक शांति और श्रमिक हितों की रक्षा के लिए की गई थी, ताकि बेहतर कार्य वातावरण और उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।
श्रमिकों की स्थिति को लेकर भी उठाए सवाल
भाकपा ने उत्तर प्रदेश में श्रमिकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि श्रमिक लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों का सामना कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि न्यूनतम मजदूरी संशोधन सहित कई घोषणाएं अब तक लागू नहीं हो सकी हैं।
विरोध को समर्थन देने की बात
भाकपा ने स्पष्ट किया कि वह ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बयान का पूर्ण समर्थन करती है और मजदूर हितों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आवाज उठाती रहेगी। पार्टी ने सरकार से श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों से जुड़े मामलों पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
