हाई कोर्ट को 5 साल से ज्यादा समय से पेंडिंग मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने चाहिए: केंद्रीय मंत्री अमित शाह

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जगदलपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि हाई कोर्ट को पांच साल से ज्यादा समय से पेंडिंग मामलों के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने चाहिए.

“कोर्ट में लंबित मामलों का जल्द हो निपटारा”

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में सेंट्रल जोनल काउंसिल (CZC) की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए, शाह ने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामलों और रेप के मामलों में समय पर DNA टेस्टिंग से इन अपराधों में सजा की दर “100 प्रतिशत” तक बढ़ सकती है. अमित शाह ने कहा कि हाई कोर्ट को उन मामलों के तेज़ी से निपटारे के लिए विशेष अदालतें बनानी चाहिए जो पांच साल से ज़्यादा समय से अदालतों में लंबित है. प्रशासन को गंभीर अपराधों से निपटने में गंभीरता दिखानी चाहिए.

सरकार का लक्ष्य 2029 से पहले हर आपराधिक मामले का निपटारा सुनिश्चित करना होना चाहिए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने वाले मामले भी शामिल हैं, और यह काम तीन साल के भीतर होना चाहिए- अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

बस्तर में शाह की बड़ी बातें

शाह ने मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों से यह भी आग्रह किया कि वे अपनी 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन को केंद्रीय गृह मंत्रालय के मॉडल फॉर्मेट के अनुसार लागू करें और अपने कॉल सेंटरों का आधुनिकीकरण करें.

खाने में मिलावट के मामलों पर उन्होंने कहा कि दोषी संस्थानों पर लगाए गए जुर्माने का व्यापक प्रचार किया जाना चाहिए ताकि लोगों में जागरूकता पैदा हो सके. नए आपराधिक कानूनों के लागू होने का ज़िक्र करते हुए शाह ने कहा कि तीन “नवीन न्याय संहिताएं” प्रभावी ढंग से लागू की गई हैं, लेकिन कुछ पहलुओं पर और जोर देने की जरूरत है.

केंद्रीय मंत्री ने स्कूलों में पढ़ाई छोड़ने की दर को कम करने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की जरूरत पर भी ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधाएं सुनिश्चित करना एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि ज्यादातर कल्याणकारी योजनाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जुड़ी हैं.

नक्सल मुक्त भारत का श्रेय जवानों को- अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का पूरा श्रेय हमारी सुरक्षा बलों के जवानों की कड़ी मेहनत और बहादुरी को जाता है. खुफिया एजेंसियों, राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के तालमेल भरे प्रयासों ने नक्सलियों के खिलाफ समय पर और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की. संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण के तहत, राज्य सरकारों और केंद्रीय विभागों के साथ मिलकर काम करते हुए, नक्सलवाद से मुक्त कराए गए इलाकों में विकास के काम भी साथ-साथ चलाए गए.

हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि नक्सल-प्रभावित इलाके लगभग पांच दशकों से विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं. यह प्रयास तब तक जारी रहेगा, जब तक ये इलाके विकास के मामले में देश के बाकी हिस्सों के बराबर नहीं आ जाते- अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

नक्सल मुक्त बस्तर में पहली बार हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक

इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया. शाह ने कहा कि यह “बहुत खुशी” की बात है कि ‘नक्सल-मुक्त भारत’ का “ऐतिहासिक मील का पत्थर” हासिल करने के बाद यह बैठक बस्तर में हो रही है.

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