कोयला गैसीकरण को मिली नई रफ्तार, केंद्र की 37,500 करोड़ की योजना को मंजूरी

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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, SECL में भी शुरू हुई संभावनाओं की पड़ताल

नई दिल्ली/बिलासपुर। देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देना है।

आयात पर निर्भरता कम करने की तैयारी

सरकार का मानना है कि इस योजना से एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। योजना के तहत लगभग 75 मिलियन टन कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

नई परियोजनाओं को प्लांट और मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजनाओं का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

SECL में भी कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं पर काम

केंद्र सरकार की इस पहल का असर देश की प्रमुख कोयला कंपनियों में भी दिखाई देने लगा है। South Eastern Coalfields Limited (SECL) द्वारा भी कोयला गैसीकरण की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

SECL के भटगांव क्षेत्र स्थित महामाया खदान में कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं का परीक्षण और तकनीकी अध्ययन जारी है। माना जा रहा है कि यह पहल भविष्य में कोयले के स्वच्छ और वैकल्पिक उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

क्या है कोयला गैसीकरण तकनीक

कोयला गैसीकरण तकनीक के जरिए कोयले को सिंथेसिस गैस यानी ‘सिंगैस’ में बदला जाता है। इस गैस का उपयोग उर्वरक, रसायन, ईंधन और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र में वैल्यू एडिशन बढ़ेगा बल्कि औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

लाखों करोड़ निवेश और रोजगार की संभावना

सरकार के अनुसार इस योजना से देश में करीब 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित हो सकता है। साथ ही लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना जताई गई है। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

भारत के विशाल कोयला भंडार पर सरकार की नजर

भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन कोयला और 47 बिलियन टन लिग्नाइट का विशाल भंडार उपलब्ध है। ऐसे में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

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