पीड़ित की एसएसपी से गुहार— “साहब! मुझे बचा लो, ये मुझे जान से मार देंगे”

By
Advertisement
Advertisement

भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: अवैध कब्जे की शिकायत करने पर ग्रामीण की बेरहमी से पिटाई..

लैलूंगा में सरकारी जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर जानलेवा हमला; निशाने पर पत्रकार भी थे..

रायगढ़/लैलूंगा@दैनिक खबर सार :– जिले के लैलूंगा में कानून व्यवस्था को ठेंगे पर रखकर भू-माफियाओं ने एक बार फिर आतंक का नंगा नाच किया है। ग्राम कुजारा के एक जागरूक किसान जनेश्वर महतो को सरकारी जमीन बचाने की कीमत अपनी जान दांव पर लगाकर चुकानी पड़ रही है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि इलाके में माफियाओं का खौफ इस कदर है कि वे अब पुलिस और प्रशासन से भी बेखौफ हो चुके हैं।

पत्रकार को मारने की थी साजिश, ग्रामीण चढ़ा हत्थे:

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी रोंगटे खड़े करने वाली है। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने इस हमले की पूरी प्लानिंग एक स्थानीय पत्रकार को ठिकाने लगाने के लिए की थी, जो लगातार भू-माफियाओं के काले कारनामों को उजागर कर रहा था। पत्रकार के मौके पर न मिलने पर आरोपियों ने अपना पूरा गुस्सा शिकायतकर्ता जनेश्वर महतो पर उतार दिया। यह हमला न केवल एक व्यक्ति पर है, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबाने की एक कुत्सित कोशिश है।

गला दबाकर हत्या का प्रयास:

पीड़ित जनेश्वर महतो के अनुसार, सरपंच पति दिलकुमार भगत और सरोज प्रधान ने अपने साथियों के साथ मिलकर वन विभाग की बाउंड्री के पास उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने जनेश्वर को गंदी गालियां देते हुए लात-मुक्कों से बेदम पिटाई की। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने उसका गला दबाकर उसे जान से मारने की कोशिश की।

एसएसपी साहब! मुझे बचा लो…

खून से लथपथ और दहशत में डूबे जनेश्वर महतो ने अब जिले के शीर्ष अधिकारियों से सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित ने कांपती आवाज में कहा—

> “एसएसपी साहब, मुझे बचा लो! ये माफिया बहुत ताकतवर हैं, ये मुझे कभी भी जान से मार देंगे। प्रशासन मेरी रक्षा करे।”

क्या पुलिस को दी जा रही है चुनौती?

मामले में लैलूंगा थाना प्रभारी ने तत्काल एफआईआर (FIR) तो दर्ज कर ली है, लेकिन आरोपियों का खुलेआम घूमना पुलिस की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। शासकीय ‘बड़े झाड़ के जंगल’ पर अवैध कब्जा करने वाले ये रसूखदार आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?

प्रशासन के लिए सुलगते सवाल:

* क्या जिले में पत्रकार और जागरूक नागरिक अब सुरक्षित नहीं हैं?

* क्या शिकायत करने वालों को इसी तरह लहूलुहान किया जाता रहेगा?

* क्या रायगढ़ पुलिस इन माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त ‘नजीर’ पेश करेगी?

इस घटना के बाद से स्थानीय मीडिया जगत और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान पर टिकी हैं कि वे इस ‘गुंडाराज’ पर लगाम कसते हैं या फिर माफियाओं के हौसले इसी तरह बढ़ते रहेंगे।

Advertisement
Share This Article