कवर्धा में पानी संकट की मार: बूंद-बूंद को तरसे बैगा परिवार, 5 किमी दूर झिरिया बना एकमात्र सहारा, प्रशासन पर सवाल

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कबीरधाम जिले के कवर्धा क्षेत्र में बैगा परिवारों को आज भी 5 किमी दूर झिरिया से पानी लाना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन के बावजूद पेयजल की सुविधा नहीं, प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कवर्धा। कबीरधाम जिले के कुकदुर तहसील अंतर्गत पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में बसे ग्राम पंचायत सेंदुरखार के आश्रित गांव आज भी मूलभूत सुविधा पेयजल से वंचित है। वर्षों से जारी इस समस्या के कारण आदिवासी परिवारों का दैनिक जीवन कठिनाइयों से घिरा हुआ है।ग्रामीणों को हर दिन पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। बांगर क्षेत्र के चौऊरडोंगरी में 31 घर बैगा परिवार, ऐरुगटोला-टीकरीटोला में 43 घर बैगा परिवार तथा सांईटोला-राहीडांढ़ में लगभग 40 घर गोंड, बैगा और धोबा समुदाय के लोग निवासरत हैं।

इन सभी बस्तियों में आज तक पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि ग्रामीण आज भी पारंपरिक जलस्रोतों-कुएं और झिरिया-पर निर्भर हैं, जो गर्मी के दिनों में सूखने लगते हैं। पानी की कमी का सबसे अधिक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है।

उन्हें रोजाना 2 से 5 किलोमीटर तक खड़ी, पथरीली और उबड़-खाबड़ पहाड़ियों से होकर पानी लाना पड़ता है। यह सफर न केवल श्रमसाध्य है, बल्कि कई बार जोखिम भरा भी साबित होता है। बरसात के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं, जब रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं और जलस्रोत तक पहुंचना कठिन हो जाता है।

Kawardha,
 पहाड़ चढ़कर ला रही पानी

कई बार की मांग कोई पहल नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद इन दुर्गम इलाकों तक सुविधाएं नहीं पहुंच पाई है, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इन गांवों में प्राथमिकता के आधार पर हैंडपंप लगाएं, नल-जल योजना का विस्तार या अन्य वैकल्पिक स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Kawardha,

कुएं से पानी निकलते हुए बैगा परिवार

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