शराबी शिक्षक पर गिरी गाज: ग्रामीणों के विरोध के बाद जांच में नशे में धुत मिले शिक्षक, कार्रवाई की मांग तेज

स्कूल में शराब के नशे में पहुंचे शिक्षक, ग्रामीणों ने जताया कड़ा विरोध
सरगुजा। लखनपुर विकासखंड के गुमगरा खुर्द स्थित शासकीय प्राथमिक शाला बरतीपारा में एक शिक्षक का शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का मामला सामने आया है। शिक्षक के इस गैरजिम्मेदाराना रवैये से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल पहुंचकर विरोध जताया और उसे बर्खास्त करने की मांग उठाई।
ग्रामीणों द्वारा सूचना मिलने पर संकुल समन्वयक विनोद गुप्ता स्कूल पहुंचे, जहां जांच के दौरान शिक्षक शैलेंद्र सिंह पोर्ते नशे में धुत मिले। यह मामला कोई नया नहीं है, बल्कि पूर्व में भी उक्त शिक्षक पर कई बार शराब पीकर स्कूल आने के आरोप लग चुके हैं। शिक्षा विभाग द्वारा कई बार स्पष्टीकरण नोटिस जारी करने के साथ ही अवैतनिक दंड भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक की आदत में सुधार नहीं हुआ।
लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि शिक्षक शैलेंद्र सिंह पोर्ते आए दिन शराब पीकर स्कूल आते हैं, उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर चले जाते हैं। सोमवार, 24 फरवरी को जब वह फिर से शराब के नशे में स्कूल पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया और अधिकारियों को इसकी सूचना दी।
संकुल समन्वयक ने की जांच, प्रतिवेदन खंड शिक्षा अधिकारी को सौंपा
घटना की जानकारी मिलने पर सीएससी विनोद गुप्ता मौके पर पहुंचे और जांच के दौरान शिक्षक को नशे की हालत में पाया। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों से पूछताछ कर जांच प्रतिवेदन तैयार किया गया, जिसे खंड शिक्षा अधिकारी को सौंप दिया गया है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
ग्रामीणों की मांग: शिक्षक को तत्काल बर्खास्त किया जाए
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक का यह रवैया बच्चों के भविष्य के लिए घातक है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षा विभाग इस मामले में सख्त कदम उठाए और शिक्षक को तत्काल बर्खास्त किया जाए। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विद्यालय के प्रधान पाठक इस पूरे मामले को छुपाने का प्रयास कर रहे थे, जिससे शिक्षक के नशे में स्कूल आने की आदत बनी रही।
पूर्व में भी नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया था
संकुल समन्वयक विनोद गुप्ता ने बताया कि शिक्षक शैलेंद्र सिंह पोर्ते को पहले भी नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया था, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। विभाग द्वारा कई बार नोटिस जारी करने और अवैतनिक दंड देने के बाद भी शिक्षक अपनी हरकतों से बाज नहीं आए।
अब सवाल यह उठता है कि क्या शिक्षा विभाग इस पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा?