रामानुजगंज में मिली 96 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि: ज्ञानभारतम अभियान के तहत ऐतिहासिक धरोहर का हुआ दस्तावेजीकरण

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बलरामपुर, 22 मई 2026

ज्ञानभारतम अभियान में सामने आई अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर, विशेषज्ञों ने किया अवलोकन

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की खोज का कार्य लगातार जारी है। इसी क्रम में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामानुजगंज मध्य बाजार क्षेत्र से 96 वर्ष पुरानी एक अत्यंत दुर्लभ पांडुलिपि प्राप्त हुई है।

यह पांडुलिपि रामेश्वर प्रसाद गुप्ता के निवास से मिली, जिसके बाद जिला स्तरीय समिति के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर इसका विस्तृत अवलोकन किया।

1928 के आसपास लिखी गई पांडुलिपि में ऐतिहासिक और धार्मिक विवरण दर्ज

पांडुलिपि के संरक्षक रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने बताया कि यह दस्तावेज उनके दादाजी लक्ष्मी प्रसाद रौनियार द्वारा लगभग 96 वर्ष पूर्व हस्तलिखित किया गया था, जिसे परिवार ने आज तक सुरक्षित रखा है।

पांडुलिपि में शारदा माता की भक्ति स्तुति, भैरवी, द्रौपदी का विनय, गजल, दोहा, चौगोला और दादरा जैसी साहित्यिक विधाओं का समावेश मिलता है। साथ ही इसमें रामानुजगंज क्षेत्र की जीवनदायिनी कन्हर नदी में आई ऐतिहासिक बाढ़ का विस्तृत विवरण भी दर्ज है।

इसके अलावा दस्तावेज में एक वंश-वृक्ष का कलात्मक चित्रण भी शामिल है, जो इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

अधिकारियों ने किया निरीक्षण, दस्तावेज को ऑनलाइन पोर्टल पर किया गया अपलोड

ज्ञानभारतम अभियान की जिला स्तरीय समिति के नोडल अधिकारी रामपथ यादव, सहायक नोडल संजय कुमार गुप्ता एवं जिला ग्रंथपाल राजकुमार शर्मा ने मौके पर पहुंचकर पांडुलिपि का सूक्ष्म परीक्षण किया।

अवलोकन के दौरान एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जगदलपुर) के प्रभारी अधिकारी हरनेक सिंह ने दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी करते हुए इसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया।

अधिकारियों के अनुसार, पांडुलिपि की हस्तलिपि, भाषा शैली और लेखन की कलात्मकता अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक महत्व की है।

प्रशासन ने नागरिकों से ऐतिहासिक धरोहर साझा करने की अपील की

ज्ञानभारतम अभियान का उद्देश्य देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना है। इस अभियान के तहत नागरिकों से अपील की गई है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन ग्रंथ, पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हो तो वे इसकी जानकारी प्रशासन को दें, ताकि इन्हें डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा सके।

 

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