गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटखर्रा से भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ पदस्थ रोजगार सहायक बोधराम चौधरी और ग्राम पंचायत कोटखर्रा के उपसरपंच गणेश राठौर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों की मजदूरी राशि में भारी फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगा है। जांच में दोनों के खिलाफ मिले दस्तावेज और शिकायतें सही पाई गई हैं, जिससे पंचायत में हड़कंप मच गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उपसरपंच गणेश राठौर कमीशन के लिए रोजगार सहायक बोधराम चौधरी पर लगातार दबाव बनाता था। इसी दबाव में आकर दोनों ने मिलीभगत से PM आवास योजना के 16 हितग्राहियों के मकानों में मनरेगा से फर्जी हाजिरी भर दी। असल में काम करने वाले मजदूरों की जगह अपने चहेतों और निजी लोगों के नाम से मस्टररोल भरे गए और मजदूरी की रकम निकालकर आपस में बांट ली गई।
पंचायत भवन में हुई जांच, रंगे हाथों पकड़ाए दोनों आरोपी
ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 जून 2026 को जनपद पंचायत मरवाही के रोजगार गारंटी इंजीनियर जांच दल के साथ कोटखर्रा पंचायत भवन पहुंचे। इस दौरान जांच स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीण, पंचायत सचिव और मुख्य शिकायतकर्ता मनमोहन गुर्जर उपस्थित रहे।
जांच में दस्तावेजों का मिलान करने पर फर्जीवाड़ा सामने आ गया। मस्टररोल में जिन लोगों के नाम से हाजिरी भरी गई थी, वे मौके पर मिले ही नहीं। जांच में रोजगार सहायक बोधराम चौधरी और उपसरपंच गणेश राठौर को दोषी ठहराया गया। जांच दल के सामने दोनों कोई जवाब नहीं दे पाए।
16 गरीबों का हक मारा, 3.5 लाख से ज्यादा का घोटाला
इस फर्जीवाड़े से लगभग 16 गरीब हितग्राहियों की मजदूरी का पैसा उनके खाते में न जाकर दूसरों के खातों में चला गया। एक आवास पर करीब 90 से 95 दिन की मजदूरी यानी लगभग 20-22 हजार रुपये का भुगतान होता है। इस हिसाब से 16 आवासों में 3.5 लाख रुपये से ज्यादा का घोटाला हुआ है।
पीड़ितों ने खोली पोल, जनपद पंचायत में दर्ज कराई थी लिखित शिकायत
अपने साथ हुए इस धोखे के खिलाफ ग्रामीण चुप नहीं बैठे। मुख्य पीड़ित मनमोहन गुर्जर, हेतराम धुर्वे, बाबूलाल, मेघवाल और होतम सिंह सहित अन्य प्रभावित ग्रामीणों ने लामबंद होकर जनपद पंचायत मरवाही में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों ने साक्ष्यों के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
दोषी पाए जाने के बाद की नई जालसाजी, कोरे कागज पर लिए फर्जी दस्तखत
जांच में दोषी ठहराए जाने के एक दिन बाद ही रोजगार सहायक बोधराम चौधरी और उपसरपंच गणेश राठौर ने नई जालसाजी को अंजाम दिया। दोनों ने मिलकर जिन हितग्राहियों का फर्जी हाजिरी भर कर पैसा निकाला गया था, उन्हीं से कोरे कागज में फर्जी दस्तखत करवाकर जनपद पंचायत मरवाही में जमा कर दिया।
इस हरकत से और साफ हो गया है कि रोजगार सहायक बोधराम चौधरी और उपसरपंच गणेश राठौर ने मिलकर सोची-समझी साजिश के तहत घोटाला किया है।
भ्रष्टाचार साबित होने पर ग्रामीणों में आक्रोश, बर्खास्तगी और जेल की मांग
जांच में भ्रष्टाचार साबित होने के बाद अब कोटखर्रा के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। पीड़ितों का कहना है कि गरीबों के हक का पैसा मारने वाले ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और जनप्रतिनिधि को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आरोपी रोजगार सहायक बोधराम चौधरी और उपसरपंच गणेश राठौर के खिलाफ पुलिस थाने में FIR दर्ज कर दोनों को जेल भेजा जाए। साथ ही गबन की गई पूरी राशि वसूल कर असली हितग्राहियों को दी जाए।
ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किए बिना ही फर्जी मस्टररोल तैयार किए गए। यह पेसा कानून का सीधा उल्लंघन है।
अब देखना यह होगा कि जनपद पंचायत और जिला प्रशासन इस प्रमाणित भ्रष्टाचार पर कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है। दोनों आरोपियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।


