स्कूल में खतरनाक परिस्थितियों में पढ़ रहे छात्र

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कई पुराने स्कूल भवन की दीवारें ढह रही हैं

एक ओर जहाँ शिक्षा पर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से कई बड़ी योजनाएं लागू की गई है, वही दूसरी ओर कई विद्यालय ऐसे है, जहाँ छात्र आज भी खतरनाक परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं।  इसका एक ज्वलंत उदाहरण सुंदरगढ़ जिले के बणई उपखंड स्थित गुरुंडिया प्रखंड़ अंतर्गत आनेवाले जोड़ा पंचायत के बुरदा सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिला है।

सन् 1950 में जब इस विद्यालय की स्थापना हुई थी तब पहली कक्षा से लेकर सातवीं कक्षा तक कुल 46 छात्र यहां पढ़ते थे।

इस विद्यालय के एक कक्ष में पहली,दूसरी,तीसरी कक्षा, एक कक्ष में चौथी, पांचवीं कक्षा और एक अन्य कक्ष में छठी से सातवीं कक्षा के बच्चे पढ़ रहे हैं।

जहां तक स्कूल की स्थिति की बात करें तो पुराने मकान की दीवार में दरारें आ गई है। ऊपर छत में एस्बेस्टस की दरारों से होकर आसमान दिख रही हैं। प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने कहा कि स्कूल की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेज रहे हैं। उन्होंने तत्कालीन उपजिलाधिकारी को लिखित रूप से स्कूल की इस समस्या से सूचित किया।

हालांकि, जब मरम्मत कार्य कराने की राशी आती है, तो प्रधानाध्यापक कहते हैं कि विद्यालय मरम्मत के लिए नये फंड का उपयोग ही नहीं किया जायेगा।  इस वक्त स्कूल की हालत बिलकुल भी अच्छी नहीं है, अत: विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उक्त विद्यालय के पुराने भवनों को तोड़कर नये भवन बनाने की मांग की है।

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