सूरजपुर में खेल का स्तर स्तरहीन: खेल अधिकारी पर भ्रष्टाचार और कागजी खेल का आरोप

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सूरजपुर कौशलेन्द्र यादव ।कभी छत्तीसगढ़ का खेल नगरी कहलाने वाला सूरजपुर जिला आज खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है। जिले में खेलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण शिविर, प्रतियोगिताएं और प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे, लेकिन वर्तमान खेल अधिकारी  के कार्यकाल में खेल गतिविधियां कथित तौर पर केवल कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। स्थानीय सूत्रों  ने उन पर भ्रष्टाचार और शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।

बहरहाल जिले के वॉलीबॉल सहित अन्य विधाओं के खिलाड़ियों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि खेल अधिकारी की कार्यशैली की जांच की जाए और खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, भविष्य में पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी आयोजन सुनिश्चित किए जाएं ताकि सुरजपुर फिर से छत्तीसगढ़ की खेल नगरी बन सके।

कागजी खेल का ताजा उदाहरण

सूत्रों की मानें तो पिछले महीने खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित ग्रीष्म कालीन खेल प्रशिक्षण शिविर इसका जीवंत उदाहरण है। ग्राम पंचायत हर्राटिकरा में पहले से ही खेलो इंडिया के तहत फुटबॉल प्रशिक्षण चल रहा है, लेकिन खेल अधिकारी ने उसी स्थान पर ग्रीष्म कालीन शिविर का बैनर लगाकर फोटो खींचवाकर दावा किया कि बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हकीकत में कोई नया प्रशिक्षण नहीं हुआ। शासन द्वारा शिविर के लिए स्वीकृत राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया, जिससे खिलाड़ी सुविधाओं से वंचित रहे।

विश्रामपुर में वॉलीबॉल अकादमी की बदहाली

सूत्रों की मानें तो विश्रामपुर में जिला प्रशासन द्वारा बालिकाओं के लिए स्थापित वॉलीबॉल अकादमी भी कागजी खेल का शिकार हो रही है। खेल अधिकारी ने दावा किया कि 30 दिन का ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, लेकिन यह केवल दस्तावेजों में दर्ज है। सूरजपुर स्टेडियम का वॉलीबॉल मैदान, जो पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वसुविधायुक्त माना जाता है, वहां ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन ही नहीं हुआ। खिलाड़ियों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कुदरगढ़ महोत्सव में हास्यास्पद आयोजन
सूत्रों की मानें तो कुदरगढ़ महोत्सव 2025 के तहत आयोजित महिला वॉलीबॉल प्रतियोगिता ने भी खेल अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इस प्रतियोगिता में केवल तीन टीमें—बरपारा, मरगांव कोलरी, और सुंदरगंज—ने हिस्सा लिया। बिना किसी प्रतिस्पर्धा के तीनों टीमों को क्रमशः प्रथम (21,000 रुपये), द्वितीय (15,000 रुपये), और तृतीय (11,000 रुपये) पुरस्कार देकर कुल 47,000 रुपये का पुरस्कार वितरित कर दिया गया। खिलाड़ियों का कहना है कि सामान्यतः प्रतियोगिताओं में 15-20 टीमें हिस्सा लेती हैं और प्रतिस्पर्धा के बाद विजेताओं का चयन होता है। इस आयोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ पुरस्कार बांटने का बहाना था…?

खिलाड़ियों में आक्रोश, जिम्मेदार कौन….?

खिलाड़ियों का आरोप है कि खेल अधिकारी आरती पाण्डे केवल अपनी उपलब्धियां दिखाने के लिए कागजी खेल खेल रही हैं। शासन द्वारा दी गई राशि का उपयोग खिलाड़ियों के उत्थान के बजाय बिल-वाउचर के जरिए गलत तरीके से खर्च किया जा रहा है। सूरजपुर के खिलाड़ी सुविधाओं और प्रोत्साहन से वंचित हो रहे हैं, जिससे जिले का खेल स्तर लगातार गिर रहा है। सवाल उठता है कि जब पहले से ही खेलो इंडिया और अकादमियां संचालित हैं, तो वहां ग्रीष्मकालीन शिविर दिखाकर राशि का दुरुपयोग क्यों किया जा रहा है….?

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