शहर को दहला देने वाला गैस सिलेंडर विस्फोट:

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बजरंग होटल आगजनी में सिलेंडर फटने का सच पुलिस रिकॉर्ड से गायब

RTI से हुआ सनसनीखेज खुलासा

राजनांदगांव। (क्रांतिकारी संकेत)
पुराना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित बजरंग होटल में 26–27 अगस्त 2022 की मध्यरात्रि हुई भीषण आगजनी और विस्फोट की घटना एक बार फिर चर्चा में है। इस भयावह हादसे ने पूरे शहर को दहला दिया था। प्रत्यक्षदर्शियों और उस समय प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के अनुसार होटल परिसर में रखे एक से अधिक गैस सिलेंडरों के फटने से आग ने विकराल रूप ले लिया था।

लेकिन अब सामने आया है एक चौंकाने वाला तथ्य—इतनी गंभीर घटना के बावजूद पुलिस जांच अभिलेखों, पंचनामे और केस डायरी में फटे गैस सिलेंडरों का कोई उल्लेख ही नहीं किया गया। इस खुलासे के बाद पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


❗ लापरवाही नहीं, सुनियोजित चूक का आरोप

दैनिक क्रांतिकारी संकेत के पूर्व संपादक नरेंद्र कुमार जैन ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि RTI से प्राप्त जानकारी से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत गैस कंपनी के दो विस्फोटित सिलेंडरों को न तो जब्त किया गया और न ही जांच रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।
उनका कहना है कि यह साधारण प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक सोची-समझी कार्रवाई प्रतीत होती है, ताकि आगजनी के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार पक्षों को बचाया जा सके।

उनके अनुसार, गैस सिलेंडर का फटना इस पूरे हादसे का सबसे अहम तथ्य है। इसका उल्लेख न होना होटल प्रबंधन, गैस आपूर्ति एजेंसी और संबंधित जिम्मेदार संस्थाओं की भूमिका पर जानबूझकर पर्दा डालने जैसा है।


🧯 जांच को भटकाने का गंभीर संदेह

विशेषज्ञों का मानना है कि सिलेंडर विस्फोट से जुड़े तथ्यों को रिकॉर्ड से बाहर रखने से—

  • सुरक्षा मानकों के उल्लंघन
  • संभावित आपराधिक लापरवाही
  • गैस भंडारण व वितरण में गंभीर चूक
    जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है।
    इससे यह आशंका भी गहराती है कि जांच को जानबूझकर सीमित दिशा में मोड़ा गया, ताकि बड़े जिम्मेदारों तक मामला न पहुंचे।

📌 पुनः जांच और कठोर कार्रवाई की मांग

आवेदन में निम्न मांगें प्रमुख रूप से रखी गई हैं—

  • आगजनी प्रकरण क्रमांक 06/2022 की संपूर्ण फाइल की पुनः जांच
  • फटे गैस सिलेंडरों की विधिवत एंट्री
  • घटनास्थल का पुनः निरीक्षण कर नया पंचनामा तैयार किया जाए
  • फॉरेंसिक एवं विस्फोट विशेषज्ञों से तकनीकी जांच
  • सिलेंडर की एंट्री न करने वाले पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
  • दोषियों पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई

⚖️ जनहित और न्याय से जुड़ा मामला

यह प्रकरण अब केवल एक आगजनी की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है। शहरवासियों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या इस विस्फोटक मामले में सच सामने आएगा या फिर यह मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।


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