राउरकेला पुलिस पर गंभीर आरोप: बिना सबूत अपहरण का झूठा मामला गढ़ने का खुलासा

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राउरकेला पुलिस जिला अंतर्गत बंडामुंडा थाना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। थाना क्षेत्र में पदस्थ रहे कई थाना प्रभारियों और उप निरीक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला राजकुमारी चौधरी के कहने पर उसके देवर हरहर शम्भु को बिना किसी ठोस सबूत के झूठे अपहरण मामले में प्रताड़ित किया।

आरोप के अनुसार पुलिस ने हरहर शम्भु पर यह दबाव बनाया कि वह कथित रूप से अपहृत बच्चे को थाने में प्रस्तुत करे, जबकि पुलिस के पास यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि जिस बच्चे के अपहरण का आरोप लगाया जा रहा है वह लड़की है या लड़का। स्थिति तब और संदिग्ध हो गई जब हरहर शम्भु ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत बंडामुंडा थाना से यह जानकारी मांगी कि उस पर किस बच्चे के अपहरण का आरोप है, लेकिन थाना बच्चे से जुड़ी कोई भी जानकारी देने में असमर्थ रहा।

इतना ही नहीं, पुलिस द्वारा यह दावा किया गया कि हरहर शम्भु ने बच्चे को बिहार स्थित अपने पैतृक आवास में छिपा रखा है। इस पर हरहर शम्भु ने जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से राउरकेला पुलिस अधीक्षक से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की कि यदि उसका पैतृक आवास बिहार में है तो पुलिस उसे ढूंढकर दिखाए। लेकिन पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब पुलिस अधीक्षक नितेश वाधवानी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजकिशोर मिश्रा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि न तो किसी बच्चे का अपहरण हुआ था और न ही हरहर शम्भु का कोई पैतृक आवास बिहार राज्य में है।

जांच के निष्कर्षों के बाद यह मामला पुलिस की लापरवाही और बिना जांच के कार्रवाई का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि निर्दोष व्यक्ति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी।

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