मजदूर विरोधी श्रम कोड वापस लेने की मांग, भारत बंद को समर्थन

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केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के जॉइंट प्लेटफॉर्म के आह्वान पर देशव्यापी आम हड़ताल/भारत बंद का आयोजन किया गया। यह हड़ताल केंद्र सरकार की श्रम एवं आर्थिक नीतियों के विरोध में घोषित की गई। यूनियनों का आरोप है कि नए लेबर कोड के माध्यम से मजदूरों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर की गई है तथा कानूनी सुरक्षा उपायों को सीमित किया गया है, जिससे मजदूर वर्ग के अधिकारों और हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने श्रम कोड को मजदूर विरोधी बताते हुए इसके संभावित प्रभावों को इस प्रकार रखा:

1. कार्य के घंटे 12 तक बढ़ने की आशंका


2. न्यूनतम वेतन, बोनस और ग्रेच्युटी पर असर


3. स्थायी नौकरियों में कमी


4. ठेका, अस्थायी और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा


5. हड़ताल के अधिकार पर प्रतिबंध


6. यूनियन गठन और मान्यता में बाधाएं


7. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (ईएसआई) के कमजोर होने की आशंका


8. पीएफ की गारंटी को लेकर चिंता


9. रोजगार सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव


10. छंटनी और तालाबंदी को आसान बनाने का आरोप



यूनियनों ने मांग की कि मजदूरों को जीवन यापन योग्य न्यूनतम 35 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।

भारत बंद के समर्थन में राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (इंटक) द्वारा अंबुजा अडानी सीमेंट प्लांट, रवान के मुख्य गेट पर आमसभा आयोजित की गई। सभा में विभिन्न मजदूर संगठनों और विपक्षी दलों का समर्थन मिलने की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:

पूर्व पाठ्य निगम मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रत्याशी बी.बी. शैलेश नितिन त्रिवेदी

ब्लॉक शहर अध्यक्ष प्रवीण सेन

ग्रामीण अध्यक्ष दीपक साहू

इंटक यूनियन उपाध्यक्ष चेतेंद्र (चीनू) वर्मा

महासचिव राधेश्याम भतपहरे

संरक्षक थानवार वर्मा

कोषाध्यक्ष टाकेश्वर साहू
तथा इंटक यूनियन के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


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